दामोदराचारी मिश्रा जी के 4 गो अनूदित कविता

एमाण्डा लवलेस अमरीकी महिला कवयित्री हई। इनकरा गुडरिड्स पोएट ऑफ द ईयर खातिर नामित कईल गईल रहे। ईहाँ के वूमेन आर सम काइंड ऑफ मैजिक सीरीज के लेखिका हइ। एमाण्डा के कुछ कविता के भोजपुरी अनुवाद उपलब्ध बा। मूल कविता के हिंदी में अनुवाद राजेश  चन्द्र के बाटे। श्री राजेश चन्द्र के हिंदी अनुवाद से एकरा के भोजपुरी में कईल बा मार द ओह दानवन के ——————- होशियार रहिहs ओह लइकन से जवन बोलेलs सन हमेशा आधा साँच काहे से कि ओकनी के हमेशा रहिहs सन प्यार में आधा तहरा…

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दामोदराचारी मिश्रा के अनूदित कइल भोजपुरी कविता

एमाण्डा लवलेस अमरीकी महिला कवयित्री हई। इनकरा गुडरिड्स पोएट ऑफ द ईयर खातिर नामित कईल गईल रहे। ईहाँ के वूमेन आर सम काइंड ऑफ मैजिक सीरीज के लेखिका हइ। एमाण्डा के कुछ कविता के भोजपुरी अनुवाद उपलब्ध बा। मूल कविता के हिंदी में अनुवाद राजेश  चन्द्र के बाटे। श्री राजेश चन्द्र के हिंदी अनुवाद से एकरा के भोजपुरी में कईल बा – अनुवादक 1. हमार बाउर सपना ____ हमरा डर ना लागेला वोह दानवन से जवन लुकाईल रहेलन स नीचे हमरा बिछवना के सबसे बेसी डर लागेला हमरा लइकन से…

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पियार के समुंदर के अरारी पर

एगो समुंदर के अरारी पर बइठल लहर के देखनी अपने ओरी आवत ढेर नीमन बुझाइल ओकर छुवन लागल जइसे ई तहरे बा छुवन एकदमे तहार पहिले नीयर तहरों के इयाद बा का साँस मन के भाव सुघर मिठकी बोल इहवाँ से तनि बालू के देखा केतना सुघर बा चारो ओरी फइलल नवहन के सपना लेखा हमनी के त बूढ़ा गइनी बाकि पानी आउर असमान अजुवो जस के तस बा लहर त बेर बेर बहरे आवता फेर समुंदर मे लउट जाता तहार इयादो ओइसे बा बाकि तू त हमरा के जाए…

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बिटिया अब बड़ हो गइल !!

दफ्तर से घरे आवे खाति जोहत ओकर मासूम चेहरा झरोखा से रासता निहारत , थाकल नींद मे मातल दूनो पियासल आँख हमरे गोड़ के अवाज सुनते केवाड़ी खोले के हल्दी मे धउरत ओकर दूनों पाँव ओकरा छोह से गोदी मे उठाके घरे अवते टाफी के उमेद मे फइलल नन्ही चुकी हथेरी ई कूल्हि आजु हमरा के अनासे इयाद आ गइल जब रोज नीयन टाफी देवे खाति जेबी मे डालत हमरे हाथ के रोकत साँय से कहलेस “बाबूजी” “अब हमरा के टाफी नाही , बाबूजी राउर जरूरत बा” तब हमरा के…

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नोबेल प्राइज विनर आयरिस कवि सिमस हीनी के कविता के भोजपुरी अनुवाद – खोदाई

हमार अंगूरी आ अंगूठा के बीचे टिकल बा पुरान लउकत कलम, बंदूक के लेखा चुस्त-दुरुस्त   हमार खिड़की के बाहर खनखनात-किरकिरात इकरी वाला ज़मीन के भीतरी धंसत कोदार के आवाज़ खुदाई कर रहल बाड़ें हमार बाबूजी , हम देखत बानी नीचे फूल के क्यारी के बीचे उनकर तनाइल पुट्ठा कबो निहुरत बा नीचे, कबो ऊपर उठत बा उ खेत कोड़त ताल मिलावत झुकत-तनत चल गइल बीस बरस पाहिले हमार मन ज़हवाँ उहाँ के आलू के खुदाई करत रहनी कोदार के बेंट धइले मजबूत हाथ से आलू के मेंड पर मारत…

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