एक बेरी के बात ह कि कैलाश मानसरोवर के एगो हंस के बियाह भइल त ऊ अपना मेहरारू हंसिनी से कहलस कि चले के बिहार घूमे. हंसिनी पुछलस कि ओहिजा देखे जुगुत का बा? तब हंस कहलन कि जवने बा तवने देखल जाई! फेर कहलस कि ओहिजा हिमालय नियन पहाड़ त नइखे, बाकिर कैमूर पहाड़ी बा, रोहतासगढ़ के किला बा. गंगा नदी नइखे त का भइल, दुर्गावती आ करमनासा नदी बाड़ी सन. भगवान भोलेनाथ नइखन त का भइल, उनके रूप गुप्तेश्वर नाथ के गुप्ताधाम बा. हंसिनी खुश हो गइली आ…
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भोजपुरी साहित्कारन के कुछ कटगरी
हम ई पहिलहीं स्वीकार कर लेत बानीं कि हमरा कुछ ना बुझाला, एह से हम जवन कहबि ओकर कवनो माने-मतलब मत निकालब स। ई त बस आजु एकदमे कुछ बुझात ना रहुए त कुछ बुझाए खातिर कुछ बूझ कह देत बानीं, बाकिर हमरा निअर आदमी से ई आशा मत करब कि हमरा कबो कुछ बुझाई। भोजपुरी में(अउरियो जगे कम-बेसी इहे होत होई। ओइसे अउरी जगह वाली बात हम अंदाजने कहलीं हँ, आपन अनुभव कुछ खास नइखे।) एह घरी तीन तरह के रचनाकार पावल जा रहल बाड़े– तप्ततन अइँठल:एह कटगरी के…
Read Moreअउवल दरजे वाली बकलोली
का जमाना आ गयो भाया,इहवाँ त बेगार नीति आ बाउर नियत वाला लो सबहरे ‘अँधेर नगरी’ का ओर धकियावे खातिर बेकल बुझात बा। का घरे का दुअरे , का गाँवे का बहरे सभे कुछ ‘टका सेर’ बेंचे आ कीने क हाँक लगावे में प्रान-पन से जुट गइल बा। अइसन लोगन का पाछे गवें-गवें ढेर लोग घुरिया रहल बा। अपना सोवारथ का चलते ओह लोगन के सुर में आपन सुरो मिला रहल बा। मने ‘मिले सुर मेरा- तुम्हारा’ क धुन खूब बज रहल बा। अउर त अउर धुन उहो लो टेर…
Read Moreग़ज़ल
चान अब त जहर तकले,निगलि जाता मानि लीं। रोज सूरुज एक रत्ती,पिघलि जाता मानि लीं।। हमरा जिनिगी में केहू के प्यार, शायद ना रहे। हरेक पल सभके मुखौटा,बदलि जाता मानि लीं।। एह शहर के आदिमिन्हि के,चाल कइसन हो गइल? बहिनि-बेटिन्हि के करेजा,दहलि जाता मानि लीं।। जहां हर रिश्ता के एगो,मोल- मरजादा रहे। नेह-नाता ऊ पुरनका,ढहल जाता मानि लीं।। जाति पर,कुछु धरम पर,सभ आपुसे में बंटल बा। राष्ट्र सर्वोपरि के भावे,मिटल जाता मानि लीं।। चाह दिल में रहे हरदम,हम जिहीं,हंसि के जिहीं। अब त मन,बस रोइये के,बहलि जाता मानि लीं।। रोज…
Read Moreमंगरुआ के मौसी
मंगरुआ के मौसी मुँहझौसी ! कतों मुँह खोल गइल। ढेरे कुछ नु बोल गइल। नाड़ा के बाति भाड़ा के बाति उजरकी कोठी आ कलफ लागल कुरता दूनों के तोल गइल। ढेरे कुछ नु बोल गइल। कहाँ, के खोलल टटोलल ! कहाँ कतना मोल भइल। ढेरे कुछ नु बोल गइल। आजु मेजबान फेरु बेजुबान घर घर घरनी के अदला-बदली तक टटोल गइल। ढेरे कुछ नु बोल गइल। कंकरीट के जंगल में लहलहात कैक्टस लेवरन अस साटल मुसुकी से परम्परा के सुनुगत बोरसी तक अचके झकोल गइल। ढेरे…
Read Moreअब ना जगबा, त ओरा जइबा
सिकुरत सिकुरत बचला मुट्ठी भर अब ना जगबा, त ओरा जइबा। पुरबुजन के नाँव हँसा जइबा॥ जे जे कांपत रहल नाँव से ओहन से अब कांपत हउवा। बीपत जब सोझा घहराइल भागत भागत हांफत हउवा॥ कतों बिलइला आ भाग परइला साँच बाति के कब पतिअइबा॥ अब … कवन डर पइसल बा भीतरी जवना से घबराइल हउवा। लालच के लत लागल तहरा बेगर बाति क घाहिल हउवा। जहाँ धरइला आ उहें छंटइला केकरा सोझा दुखड़ा गइबा॥ अब… ईरान क, का हाल छिपल बा अफगानिस्तान पुरा सफाया। दहाई में…
Read Moreभोजपुरी भाषा के मान्यता खातिर बड़हर धरना प्रदर्शन के आयोजन भइल
नई दिल्ली,भोजपुरी भाषा के संविधान का आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर ‘ भोजपुरी जन जागरण अभियान ‘ के बैनर तले जंतर-मंतर, दिल्ली पर 4 अगस्त,2024 के एगो बड़हर धरना प्रदर्शन के आयोजन भइल । जवना के अध्यक्षता प्रो.पृथ्वी राज सिंह कइलें। राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.संतोष पटेल जोरदार ढंग से अवाज उठावतकहलें कि,’ भोजपुरी के संगे छल कइल जा रहल बा। बाक़िर हमनी के रुके वाला नइखी सन। जब ले भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता ना मिल जाई ,तब ले हमनी के ई मांग उठावत रहब सन । भोजपुरी क इतिहास, साहित्य…
Read More‘बस्तर डाइरी’ के कुछ पन्ना ….’लाल गलियारा’ से लवट के
बस्तर आपन प्राकृतिक खबसूरती के अलावे कला-संस्कृति के दुनिया में एगो खास जगह राखेला। हाल-हाल तक ई इलाका ‘नक्सली’ हिंसा के चपेट में रहे आ ‘लाल गलियारा’ के धुरी बनल रहे। हम रायपुर से रात के बस धर के भोरे बस्तर के मुख्यालय चहुंपनी। फजीरे फजीरे केनियों भटके के मन ना करत रहे तऽ बस स्टैंड के ऊपरी तल्ला पऽ बनल ‘यात्री निवास’ में रुके के इरादा भइल। रूम लियाइल आ जेबी नासता करे निकले के मन भइल तबले पता चलल कि हमनी भीरी ताला ना रहे। मनेजर से पुछनी…
Read Moreपरिवार के देल पगड़ी: खानदान के इज्जत
बाप – दादा के नांव के आगे सिंह लागल रहे। सिंह के आपन एगो अलगे पहचान होला आपन एरिया में। आगे अउर बनल बाबू कुंवर सिंह नवाज देलन एगो अउर टाइटिल,नाम के आगे चौधरी लगाके काहे कि एक जंगल में दूगो सिंह ना रहे। अउर बनल चौधराहट के जोमे मातल खानदान धन के किनारे करि रईसी आ इज्जत बढ़ावे में लागि गइल।रईसी एह परिवार में ऊ ना रहे जेवन रईस परिवार में रहेला। इज्जत ढोये खातिर रईसी कान्हे ढोआत रहे। जेकर पहचान ओह घरी के बिहार के सतरहो जिला में…
Read Moreटुनटुन उर्फ पाब्लो पिकासो
” ए टुनटुन भइया तनी हमरो गइया बना दा न ।” एगो साँवला, नाटा लइका के घेरले कुल लइकी-लइका चिरौरी -बिनती करत रहलन अउर एहर अपने कला के कॉपी में गाय के पोंछ के रंगे में लवलीन सिर झुकवले टुनटुन केहुए ओरी धियान ना देत रहलन।उनकर माथा तब्बे ऊपर भइल जब उजरकी गाय रंगाय -बन्हाय के पियरका पन्ना पर एकदम हूँफे-धावे खातिर तैयार देखाय लगल। टुनटुन के नन्हकी आँख में तरई जगमगाय गइल।होठ के गोल घुमाय के उ सीटी बजवलन – ” ला लोग, धउरे खातिर हमार उजरकी तैयार हो…
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