लिखल, पढ़ल, सोचल, बोलल
मानल जाई तकरार ।
इहवाँ हमनी के सरकार ॥
हमरे से हौ नून तेल आ हमरे से कानून
चाहे रहा तू केरल बबुआ चाहे देहरादून
अगड़ा, पिछड़ा, दलित के खेला
सब हमरे ब्योपार ।
इहवाँ हमनी के सरकार ॥
कबों खातिर एस सी एस टी,कबों के बा यू जी सी
बचा-खुचा आरक्षण से, घलुआ बाटे खबर नबीसी
बिना जांच-पड़ताल के बबुआ
सुखले खइबा मार ।
इहवाँ हमनी के सरकार ॥
झगड़ो केहू कतौ भले, खतरा तहनी के सिरे
किल्लत के उठी ज्वार,रगरा बा रोज फजीरे
झूठ साँच के फेरा बाबू
बस कुरसी के दरकार ।
इहवाँ हमनी के सरकार ॥
चौड़े में धमका के बाबू ,जय हो जय हो नारा
सनेसा पर रंग रोगन, हम बानी देस दुलारा
सोसल भा अनसोसल मीडिया
चेहरा बाटे चटकदार ।
इहवाँ हमनी के सरकार ॥
पक्की के कच्ची में बदलत बेंचत सब सरकारी
गढ़त कहानी रोज नई बस सेठ के तरफदारी
कतना फाइल खोज निकलबा
हिले ना डेग हमार ।
इहवाँ हमनी के सरकार ॥
- जयशंकर प्रसाद द्विवेदी