समय लोगन का संगे साँप-सीढ़ी के खेल हर काल-खंड में खेलले बा,अजुवो खेल रहल बा। चाल-चरित्र-चेहरा के बात करे वाला लोग होखें भा सेकुलर भा खाली एक के हक-हूकूक मार के दोसरा के तोस देवे वाला लो होखे,समय के चकरी के दूनों पाट का बीचे फंसिये जाला। एहमें कुछो अलगा नइखे। कुरसी मनई के आँखि पर मोटगर परदा टाँग देले, बोल आ चाल दूनों बदल देले। नाही त जेकरा लगे ठीक-ठाक मनई उनुका कुरसी रहते ना चहुंप पावेला, कुरसी जाते खीस निपोरले उहे दुअरे-दुअरे सभे से मिले ला डोलत देखा…
Read MoreDay: February 11, 2026
जेकर खेती ओकर मति
शीतलहर के प्रकोप में अलग अलग तरह से गरमी के पैदा करे क उताजोग हो रहल बा आ लोग ओकरा के महसूसतो बा। ओह पर चरचा के बजारो गरम हो चुकल बा। कबों कवनो बैठक त कबों कवनो खिलाड़ी गरमी के श्रोत बन रहल बाड़ें। समइयो एक्के आँख से देखउवल के चल रहल बा। चाल चरित्र के बात करे वाला लोगवो एक्के आँख से देखे क आदती हो चुकल बा। उ लोग देखते भर नइखे बलुक फीरी में धमकियो दे रहल बा उहो भोंपू लगा के । मुख पोथी के…
Read Moreओरचन
दुआरी पर किनारे देवाल से सटा के खड़ा कइल बा एगो खटिया, ओकर हालत बड़ा डाँवाडोल बा ओकरा बिचवा में बड़ा झोल बा केहू के तरे सुतत होई बुझाते नइखे बाकिर ओरचन कसाइल बा ओरचन में दस गो गाँठ बा आ दोसरा ओर अइसन बिछवना बा जइसे राजा के ठाट बा। सबके माई-बाप इहे चाहेला कि आपन जामल दूध के कुल्ला करे अमृत के धार पिये भले माई-बाप जिनगी भर लुगरिये सीए। ओही दुआरी पर ना अनगिनत दुआरी पर खटिया खाड़ बा ओह संतानन खातिर माई-बाप के ढोवल पहाड़ बा।…
Read Moreआजकल बिआह में…
शादी बिआह में देखऽ आजकल बस होखऽता शोबाजी । आशीष देबे माई बाबू ,चाहें होखे न राज़ी । दुल्हा दुल्हिन गुण ना दिल मिलऽल पतरा के देखाई ? दूर आँख से पानी लाज बस देबे के बा बधाई । पूछा पाछी आ निमन्त्रण सभे वाटसैप से जाता। बिआह के नेग चार ,रसम सगरो अब बिलाइल जाता। किसिम किसिम के खाना अउर सजावट के देखावा बा। पात के भोज ,पुड़ी , बुनिया, खाजा ,कसार , हेरात बा। घर फ्लैट में समाईल टीना में माढ़ो तइयार बा। भुलाइल…
Read Moreहे चच्चा चुपचाप रहा
हे चच्चा चुपचाप रहा बहुत किहा मनमानी में, अबकी बेरिया तोहार भतीजा, खड़ा होई परधानी में। चौराहे पे कम जाल करा, दोहरा गुटखा कम खाल करा, भरि -भरि गाल फुलैले बाट्या पहिले ऐके साफ करा। हम्मै हरदम हुरपेटै ला चाची से कहब दलानी में, हे चच्चा चुपचाप रहा बहुत किहा मनमानी में। गांव कै छोटका बड़का सब, सबके सब भैवद्दी बा, नहरी पे सब हमरे संगे खेलले झाबर कबड्डी बा, गांव कै नैकी दुलहिन के भौजी कहिके गोहराईला, आशीष मिली खुब गहबर हमके झुकि _झुकि अंगुरी सोहराईला, गाल…
Read Moreभोजपुरी लेखन आ प्रकाशन-2025
भोजपुरी साहित्य आ संस्कृति के विकास के दिसाँई भोजपुरी समाज निरंतर प्रयासरत बा।भोजपुरी- विकास खातिर दर्जनन भोजपुरी संस्था लगातार कार्यक्रम आयोजित करत रहल बाड़ी सँ।साहित्यकार -कलाकार-राजनेता सभे अपना ओर से भोजपुरी के विकास खातिर हर संभव प्रयास कर रहल बा।भोजपुरी साहित्य के विकास के दिसाँई सबहर रचनात्मक प्रयास चल रहल बा।हर तरे के बिधन में विविध विषय-वस्तु पर रचनाकार लोग कलम चला रहल बा।अश्लीलतापरक गायन के मुखर विरोध हो रहल बा।सार्थक आ सोद्देश्य गायकी के सराहना मिल रहल बा।धीर-धीरे अश्लीलता आ जातीयतापरक गायन के प्रतिरोध में समानान्तर रूप से आज…
Read Moreउहे अदिमिया
” का भइया ! तोहार चाल हमके तनिको ना समझ में आवेला।अइसन धउरवला ह कि हाँफत-हाँफत करेजा दुखाय लागल। अइसन ऊँहवा का रहल ह भाय कि हेतना डेराय गइला ह ….आंय।” आपन गोल -गोल आँख नचावत, बहुत मुश्किल से मनोज अपने हंफरी के कंट्रोल करे क कोशिश में लगल रहलन।परताप मुस्कियात चाह पियत कनखी से चौरसिया ओरी ताकत पुरहर भेद से भरल रहलन।जेतने मनोज परेशान ओतने परताप उनकी ओर से बेधियान। ” का हो भइया लोग ! कवने ओरी से गोल आवत हे ? का परभू इनहुँ के त ना…
Read Moreजतिए पहिचान बा
जात में जात इहां जतिए प्रधान बा इ ह भारत इहां जतिए पहिचान बा। जात में जात जइसे केला के पतिया छिलका पियाज के जस मोथा के घसिया जात के मान इहां जतिए अभिमान बा इ ह भारत इहां जतिए पहिचान बा। पानी के जात इहां मटका के जतिया भात के जात इहां रोटियो के जतिया जात से बड़ा-छोट जतिए भगवान बा इ ह भारत इहां जतिए पहिचान बा। पीड़ित भयल इहां जतिए से मानव जतिए से मानव कहाइल दनुज-दानव चरित-गुनहीन देखा तबो सम्मान बा इ ह…
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