जब एगो कविता अपना छोटहन कलेवर में एगो मार्मिक परिवेश आ मनुजता के एगो बड़हन पीर-क्लेश के चित्र उगाहे आ बिना ठकठेन नधले साँच के तहे-तहे खोल के बतावे तब ऊ कविता साहित्य के बड़हन विभूति हो जाई, एमे कवनो शक नइखे। डॉ ब्रजभूषण मिश्र के रचल ‘बिहारी मजदूर’ अइसने काव्य-विभूति ह, जे साँझ के उदासी से उगत बा आ जिनगी के साँझ के झाँक देखा के बिसइ जात बा। कविता के शुरुआत अइसे होत बा- रोजे-रोज जुटेलन स स्टेशन पर बिहारी मजदूर झुंड के झुंड, जवना के हाँकेला एगो…
Read MoreDay: January 20, 2026
‘चौधरी कन्हैया प्रसाद स्मृति सृजन सम्मान से दुगो भोजपुरी साहित्यकार सम्मानित भइलें
विश्व पुस्तक मेला के अंतिम दिने सर्व भाषा ट्रस्ट के स्टाल पर चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह स्मृति न्यास आरा आ सर्व भाषा ट्रस्ट का ओर से भोजपुरी साहित्य के संरक्षण-संवर्धन आ सृजन खातिर वर्ष 2025 का डॉ संतोष पटेल आ वर्ष 2026 का श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के ‘चौधरी कन्हैया प्रसाद स्मृति सृजन सम्मान’ से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संपादक श्री लालित्य ललित के हाथों सम्मानित कइल गइल।
Read Moreनैनन चलावेली बान
ले भौंहन क तीर कमान नैनन ! नैनन चलावेली बान। रति सी अंग अंग हौ ढारल सोझा आइल बा, सभ हारल भरमावै सभके धियान। नैनन— साज समाज बीच जब आवे अवते इहाँ मधुर मुसुकावे सुघरई क छोड़े निसान। नैनन — जब जब सुर में गीत सुनावे मन के तार तार झनकावे सांसत में डारस परान। नैनन— जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
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