आजकल बिआह में…

शादी बिआह में देखऽ  आजकल बस होखऽता  शोबाजी । आशीष देबे माई बाबू ,चाहें होखे न राज़ी ।   दुल्हा दुल्हिन गुण ना दिल मिलऽल पतरा के देखाई ? दूर आँख से पानी लाज बस देबे के बा बधाई ।   पूछा पाछी आ निमन्त्रण सभे वाटसैप से जाता। बिआह के नेग चार ,रसम सगरो अब  बिलाइल  जाता।   किसिम किसिम के खाना अउर सजावट के  देखावा बा। पात के भोज ,पुड़ी  , बुनिया, खाजा ,कसार , हेरात बा।   घर फ्लैट में समाईल टीना में माढ़ो तइयार बा। भुलाइल…

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बाबूजी

घरवा के मुखिया लइकन के मुस्कान बाबूजी के पाकिट में रहेला सब के जान। सब के ख़ुशहाली बजा के ताली सब दुख दूर होला चुटकी में खाली। बाबूजी जइसन छाता हमनी के विधाता। दुनिया जहान में नइखे आइसन सुंदर नाता। माई के सिंदूर चमके। खेत बधार गमके। बाबूजी के पसीना से अंगना अँजोर दमके। बहाके पसीना जगाके आस। रोटी में आवेला मिठास। कर देलन चुटकी में दूर परेशानी, उनका जइसन केहू नइखे ख़ास। सविता गुप्ता राँची झारखंड

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