भोजपुरी साहित्य आ संस्कृति के विकास के दिसाँई भोजपुरी समाज निरंतर प्रयासरत बा।भोजपुरी- विकास खातिर दर्जनन भोजपुरी संस्था लगातार कार्यक्रम आयोजित करत रहल बाड़ी सँ।साहित्यकार -कलाकार-राजनेता सभे अपना ओर से भोजपुरी के विकास खातिर हर संभव प्रयास कर रहल बा।भोजपुरी साहित्य के विकास के दिसाँई सबहर रचनात्मक प्रयास चल रहल बा।हर तरे के बिधन में विविध विषय-वस्तु पर रचनाकार लोग कलम चला रहल बा।अश्लीलतापरक गायन के मुखर विरोध हो रहल बा।सार्थक आ सोद्देश्य गायकी के सराहना मिल रहल बा।धीर-धीरे अश्लीलता आ जातीयतापरक गायन के प्रतिरोध में समानान्तर रूप से आज…
Read MoreTag: डा.सुनील कुमार पाठक
मई में माई चल गइल
“डभकेला मन के सपन, माई पसवे लोर । आस सेराइल जा रहल दुख के ओर न छोर।।”(सुकुपा) ‘मातृदिवस’ के छव दिन पहिलहीं एह साल 3 मई के माई विदा ले लिहलस।जब से एह दिवस विशेष के प्रचलन भारतो में खूब बढ़ गइल , माई के फोटो हम फेसबुक पर डालल शुरु कर दिहनीं ।एह मौका पर हम माई से जब कहीं कि “फलनवा तोरा के परनाम लिखले बाड़ें” तब ऊ कहे कि “तूहूं हमरा ओरी से आसीरबाद लिख दs।सब बाबू आ बबुनी लोग हंसी-खुसी से रहो,सभे फलल-फुलाइल रहो।” अबकी…
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