माई रोवत बाड़ी

भोरे भीनसहरे धsके,भर अँकवारी माई रोवत बाड़ी, बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। सखी आ सहेली सभके अखियाँ लोराइल, छूटे के साथ बेरा जब समय नियराइल। ससुरा में रहिहs नींक से, कानवाँ में माई सिखावत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। देखे सुने वाला लोग के हो फाटेला करेजा, ओही में कहे केहू डोली हाली से ले जा। कुछ देर ठहर जा कहरु, हाथ जोरि माई कहत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। कइसे मनावल जाव दीपक सोचs तरीका, चेहरा के रंग देखs हो पर…

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जय शिव शंकर

बसहा बैलवा के शिव क के सवारी, तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारि।   औघड़ दानी हउँए सभका से उ निराला, जटा में गंगा मइया गरवा में सर्प माला। कष्ट मिटावे सभकर हउँए उ पापsहारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   क्षण में बना उ देले क्षण में बिगाड़ देले, खुश होले जब भोला सभ कुछ भर देले। धन दौलत सुख शांति देले घरs अटारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   कुपित होले जब उ खोलेले तीसरा अखियाँ, काँपे लागेला सभे केहूँ नाही पारे झकियाँ। मातल रहेले खाके…

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साँझवा बिहानवा

तहरे में डुबल रहेला साँझवा बिहानवा, तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   हटे के ना चाहेला हो सोझवा से ताहरा, एतना लगाव तोहसे भइल कइसे गाहरा। हामारा प देई दना तनिसा तू धेयानवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   व्याकुल रहेला हरदम मिले खाती तोहसे, करेला लड़ाई हरमेश तोहरा खाती हमसे। बदलs इरादा अबो सुन लs वचनवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   खुशी बहुते मिलेला हो तोहरा के देखी के, दीपक तिवारी कुछो कह तारे लिखी के। करs विचार ना त ले लs…

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शक्ति स्वरूपा

घर के मान मर्यादा के, ख्याल राखेली नारी। शक्ति स्वरूपा हई जेके, जग अबला कहे नारी।   उनुका चलते हम सभ बानी, उ हमनीन से नइखी। जइसन समझत बानी जा, शायद उ ओइसन नइखी।   माँ के फरज निभावस, ममता लुटावस नारी। कदर करs तू ओकर, ओके कबो ना दिहs गारी।   दुर्गा चंडी काली के, एगो रूप हई हो नारी। बिगड़ जइहें त प्रलय होई, असहाय ना हई नारी।   बहिन बनके बाँहेलि राखि, स्त्री बन के करेली सेवा। निःस्वार्थ भाव से करेली सभ कुछ, कबो माँगेली ना खेवा।…

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उपवन में भौरा

गीत गजल तोहै देखी मन हमार गावता, पीछे पीछे तहरी ई खिंचल चली आवता।   कइसन जादू कइलस लेले बाटे घेर, रहि रहि भीतरी ले टेसे उदबेगे बेर बेर माने ना करि मनउती कुछो ना भावता… पीछे पीछे तहरी ई खिंचल चली आवता।   होखे वाला का बा नियति के मंजूर, आपन पराया सभे होई जाला दूर आकर्षण बा एतना की नियरे बोलावता… पीछे पीछे तहरी ई खिंचल चली आवता।   उपवन में भौरा बिचरे फूलन के रस लेबेला, केहू वंचित नइखे जेके शिक्षा ई ना देबेला ताल धुन देई…

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काँहे ना केहू के सुनेल

काँहे ना केहू के सुनेल खाली अपने बतियाँ धुनेल, निमनो केहूँ कुछ कहे त आपन कान तू मुनेल मनमानी कहिया ले चली तू बुझत नइख बाति के, कहना एको सुनेल नाही बाड़ देवता तू लाती के खुरचाली करेल निशदिन रहेल ना चैन से, हरवाई में बैल प गिरे लागे ओसही सुधरब पएन से धीर धर तनि धीर धर रह कायदा कानून में, बुझतानी जवान तू बाड़ तोहरा गरमी बाटे खून में तनिको तोहरा शरम ना बाटे लज्जियाँ घोर के पियल हो, आज ले जवन ना भइल रहे ऊ सगरो उठा…

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समुन्दर से गहरा

समुन्दर से गहरा बा तोहरा से पेयार हो, कहिले साच्चे मानs बतिया हमार हो जिनगी में बाटे बस तहरे सहारा, तहरा बिना नाही होई गुजारा टूट जाई दिल जदि होई इनकार हो………… कहिले साच्चे मानs बतिया हमार हो थाँह नाही पाई केहू केतनो लगाई गोता, सोर छूट जाई चाँहे केतनो उखाँड़ी मोथा आजा जिनगी में हमारा हो जाई उजियाँर हो……..….. कहिले साच्चे मानs बतिया हमार हो तोहरा के चहँनी नजरि में छुपवानी, तहरी सूरत के मूरत बना के दिल में बसवनी हर पल तोहरे करि इनतजार हो…………… कहिले साच्चे मानs…

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नफरत क दीया

नफरत  क   दीया  काहें    हियाँ  में  जरवलु, काहें दूर हो गइलु हमारा से  कुछ ना बतवलू पेयार में कवनो हमारा पवलु का  कमी, हम    तs  गइल  रहनी,  तोहरे   में  रमी तब काहें हामार जियरा डहकवलु…… हमारा वफा के  तू  शिला नीक दिहलु, तोहरा का पता की   तू का  कई दिहलु दोसरा के नाँव क तू मेहँदी रचवलु…….. हम सोचले ना रहनी तू कबो करबू बेवफाई, जिनिगियाँ  में  हमारा  तू  देबू आग  लगाई तू कुकूर जानि हमरा के लेखा दूर दुरवलु…… तोहरा मुस्की के पाछा के जान…

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दूसरा के तनिको तू आश जनि करिहs

केहूँ के कबहुँ तू निराश मत करिहs दूसरा के तनिको तू आँश जनि करिहs खोजेला लोग समइया प सभके, भूल जाला करनी कोसेला रब्ब के सोच समझ के डेग आपन धरिहs……. दूसरा के तनिको तू आँश जनि करिहs, दे दिहs आपन तू माँगे जनि जइ हँ, बांह ल गठरी तू एके जनि भुलइ हँ उच्च खाल देखी धीरे से उतरीहs…….. दूसरा के तनिको तू आँश जनि करिहs, बनी जइबs बाउर जदि मुँह खोलबs, नीक नाही होई तनिको जो बोलबs माना ना बा दुःख पीड़ा के हरिहs……….. दूसरा के तनिको तू…

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अपने से अपने लोग हारेला हो

भरोशा ना करिह केहू पs कबो, बीच रहियें में जान लोग मारेला हो। बन के आपन देखा के मासूमियत, करेला घात दुश्मनी काढ़ेला हो। कुदरत के लिखल लेख केहू मिटा ना सके, ना त केहू ओकरा के टारेला हो। होनी होके रही लाख कोशिश कलs, अनहोनी से काहें लोग डरेला हो। कहें के सभ आपन केहू आपन ना होला, बोले के बड़ बड़ मुँह फारेला हो। एतने ले पेयार मोहब्बत रह गईल बा, मरला के बाद माँटी में गाड़ेला हो। देखत रहेला लोग हँवा के रोख, तबे बुतल दिया के…

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