ई आठवीं अनुसूची नहिंए रहे त का हरज !

( अपने अद्भुत-सरस काव्य-पाठ से दर्शकन के लोभे -मोहे में प्रकाश उदय जी जेतना निपुण हउवन, ओतने गुणी, ओतने समृद्ध अपने लेखनी से भी हउवन।आशा ह कि,अजब ओज,अलहदा वाचन-लेखन शैली, बेहद विनम्र बाकिर तनिक संकोची-लजाधुर सुभाव वाले, भोजपुरी साहित्य क सर्वप्रिय -प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रकाश उदय जी से  ‘भोजपुरी साहित्य-सरिता’ क सह-संपादिका सुमन सिंह क ई बातचीत उनके व्यक्तित्व -कृतित्व क कई पहलू उजागर करी अउर साथ ही साथ हिंदी क दशा-दुर्दशा, भोजपुरी क संवैधानिक दर्जा अउर आंदोलन क विफलता से सम्बंधित उनके खोभ-क्षोभ के भी आप लोगन के सोझा रखी…

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