कजरी

पवन झकझोरे
बालम मोरे।

नन्ही नन्ही पनिया के बुनिया
पलकिया पर ढोय ढोय
बदरी बदन प’ गिरावेले
कोंवर अंग टोय टोय
हँसले रहउँ ना
बरेला गुदरउँना
सरब अंग बोरे
बालम मोरे।

नासा भँहु तानेला अकसवा में
बोरो लागे जरत बुतात बा
धुआँ धुआँ सोरहो सिंगारवा कि
बूँन बूँन अँसुआ झुरात बा
लोर झरे अँखिया
बरवनी के पँखिया
हिलेले कोरे कोरे
बालम मोरे।

सभ्यता समर काटे चिउटी
देखत तोर लाजहीन दुनिया
कहीं उड़े पल्ला कहीं अँचरा
बदरिया के नीक ना रहनिया
चम चम बिजुरी
कमलदल अँगुरी
फोरेले पोरे पोरे
बालम मोरे।

 

  • आनन्द संधिदूत

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