आपन बात

साहित्य अपना में समाज का संगे सभे के हित समाहित राखेला आ हरमेसा बढ़न्ति का ओर गति बनवले राखे के उपक्रम विद्वान साहित्यकार लोग करत रहेलें। अइसने कुछ साहित्य जगत के मान्यतो ह। बाकि हर बेर ई सही ना होखे। कई बेर एकरा से उलट होत लउकेला। जान-बूझ के भा इरखा बस कवनो नीमन चीजु के अनदेखी कइल, उहो अइसन लोगन द्वारा जेकरा के हद तक मानक मानल जात होखे, ढेर बाउर लागेला। अइसन भइलका मन के गहिराह टीस दे जाला। कई बेर उ टीस मन के उचाट क देवेले।…

Read More

सम्पादन टीम

संरक्षक रामप्रकाश मिश्रा, अकोला उपाध्यक्ष महाराष्ट्र प्रदेश, भाजपा (उत्तर भारतीय मोर्चा) अशोक श्रीवास्तव (गाजियाबाद) अनामिका वर्मा (भोपाल) प्रकाशक आ सम्पादक जे. पी. द्विवेदी (गाजियाबाद) कार्यकारी सम्पादक डाॅ. सुमन सिंह (वाराणसी) साहित्य सम्पादक केशव मोहन पाण्डेय (दिल्ली) सहायक सम्पादक डाॅ. ऋचा सिंह (वाराणसी), सुनील सिन्हा (गाजियाबाद), डाॅ. रजनी रंजन (झारखंड) सलाहकार सम्पादक मोहन द्विवेदी (गाजियाबाद), कुलदीप श्रीवास्तव (मुंबई) तकनीकी – एडिटिंग – कम्पोजिंग सोनू प्रजापति (गाजियाबाद) छाया चित्र सहयोग आशीष पी मिश्रा (मुंबई) प्रकाशन: सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली

Read More

साहित्यकार के माने-मतलब

साहित्य एगो अइसन शब्द ह जवना के लिखित आ मौखिक रूप में बोले जाये वाली बतियन के देस आ समाज के हित खाति उपयोग कइल जाला। ई  कल्पना आ सोच-विचार के रचनात्मक भाव-भूमि देवेला। साहित्य सिरजे वाले लोगन के साहित्यकार कहल जाला आ समाज आ देस अइसन लोगन के बड़ सम्मान के दीठि से देखबो करेला। समय के संगे एहु में झोल-झाल लउके लागल बा। बाकि एह घरी कुछ साहित्यकार लो एगो फैसन के गिरफ्त में अझुरा गइल बाड़न। एह फैसन के असर साहित्यिक क्षेत्र में ढेर गहिराह बले भइल…

Read More