सारधवा

मरछिया अपने त सात गो लइका के मार कै भइल रहै .. जनमते महतारी घुरा पर फेकवा दिहली ..कौदो दे कै किनली ..बड़ा टोटरम पर .मरछिया जिएल ..मरछिया धीरे-धीरे सेयान होखे लागल ..जवानी उफान मारत रहे ..”इजवानी केकरा कस  में बा ..मरछिया एकदम गोर भभुका रहे रहे ..आओठ लाल-लाल ..नकिया सुग्गा के ठोर अइसन चोख ..अँखियांमें बुझाए काजर कईल बा ..केसिया टेढ़ टैढ़ घुंघराला  बुझाए करिया घाटा ह..माने छाछाते देवी कै मूरत ..देह के उतार चढ़ाव गजब के .. चाल मस तानी ..चोटिया नागिन खनिया  अँखिया बुझाए दारु पियले बिया…

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गीत

लाले ओठवा ए नन्हकु सूरूज देव ,लाले  तोहरे गालवा .. खेलत कूदत तुहो रहल बाबू सगरी अकासवा .. नील रंग आकासवा  से झांके ल  अजगुत बाड़े तोहर रुपवा .. कबहुँ  झांकेल केरवा के पतवा ,कबहूँ झाकेल नरियरवा . कबहुँ खेलल बबुआ सरोवरवा  कूदि -कूदि देखावेल रूपवा .. जब हम पकरिना तोहरा ए बचवा  भागल  हमरा से दूरवा .. तोहरे रूपवा से भइनी अभिभूतवा ठानेनी छठ वरतिया .. आपन बाल रूप के दिह दरसनवा खोलेनी मन के केवरिया .. खेलल पनिया में दौरेनी हम नाही तू आवेले पकड़वा बरष भर से…

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