मामा के सपना, उनकर सुख आ बिछोह

जितेंद्र कुमार हिंदी आ भोजपुरी दूनो भाषा में कविता, कहानी, समीक्षा आ संस्मरण लिखेलन। जितेंद्र कुमार के हिंदी आ भोजपुरी के कुछ किताबो छपल बा, जेकर चर्चा लोग करत रहेला। जितेंद्र जी के भोजपुरी कहानी के एगो किताब ह ‘गुलाब के कांट’। ओह में एगो कहानी बा ‘कलिकाल’। ‘कलिकाल’ के बारे में लोक में अनेक रकम के बात चलत रहेला। कुछ लोग ‘कलयुग’ कहेला। कुछ लोग ‘कलऊ’ कहेला। जब नीति-अनीति के बात होला, झगड़ा के, झंझट के, भाई-भाई के बीच विभेद के, रसम-रेवाज के टुटला के, त लोग कहेला कि…

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