गाँव आ गँवई नारी के हालत क पोढ़ लेखा-जोखा- “के हवन लछुमन मास्टर”

यथार्थ के खुरदुरा जमीन पर आम आदमी के जूझत जिनगी के जियतार बखान लीहले भोजपुरी के सुप्रसिद्ध कथाकार श्री कृष्ण कुमार जी के भोजपुरी क पहिलका उपन्यास आजु के समाज के आधी आबादी जेकर चरचा हर ओरी बा, बेटी पढ़ावों, बेटी बचाओ, के नारा लग रहल बा, “के हवन लछुमन मास्टर” के रूप मे हमनी सभे के सोझा बा । उपन्यास आपन शिल्पगत विशेषता आउर तथ्य आ कथ्य के संगे जिनगी के जवन ब्याख्या देवेला, उ जियतार होला आ समाज खाति एगो अन्हरिया मे टिमटिमात दियरी लेखा सहारा बनेला। ई…

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बाउर बातिन का बिरोध से बेसी जरूरत बा नीमन बाति के लमहर परम्परा बनावे के !

हम विषय पर आपन बात राखे का पहिले रउवा सभे के सोझा 3-4 बरिस पहिले के कुछ बात राखल चाहत बानी। 20-22 करोड़ कथित भोजपुरी भाषा भाषियन का बीच 3-4 गो पत्रिका उहो त्रमासिक भा छमाही निकलत  रहनी स। ओह समय भोजपुरी के नेही-छोही रचनाकार लोगन का सोझा भा भोजपुरी के नवहा रचनाकार लोगन के सोझा ढेर सकेता रहे। ओह घरी 3-4 गो जुनूनी लोगन का चलते भोजपुरी साहित्य सरिता के जनम भइल। एकरा पाछे एगो विचार रहे कि भोजपुरी के नवहा लिखनिहार लोगन के जगह दीहल जाव, पुरान लोगन…

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बलम परधानी लड़ाके

खा गइल बचल – खुचल पानी बलम परधानी लड़ाके। एक भइल संझिया बिहानी बलम परधानी लड़ाके।। नइहर से अइनी त दुल्हिन कहइनी भुइयां ना डेग हम दुउरे में धइनी । आज सँउसे गँउवे के रानी बलम परधानी लड़ाके…. कहेला लोग दिन तिरिया के आइल मरद – मेहरारु बराबर कहाइल। अब तु ही अगोरिहs चुल्हानी बलम परधानी लड़ाके… खा गइल बचल – खुचल पानी बलम परधानी लड़ाके… भसुरा आ देवरा बराबर बुझाला ओटवा बड़ावे ऊ संघे – संघे जाला। अगराइल पेन्ट – मरदानी बलम परधानी लड़ाके…. खा गइल बचल – खुचल…

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