कविता समीक्षा (भोजपुरी में) कविता : “केहू का थाही” कवि : जयशंकर प्रसाद द्विवेदी “केहू का थाही” समकालीन भोजपुरी कविता के एगो सशक्त सामाजिक-व्यंग्यात्मक रचना ह। एह कविता में कवि आज के समाज के बदलत चरित्र, नैतिक पतन, धार्मिक आडंबर, सामाजिक भ्रम आ मानवीय संवेदना के क्षरण पर तीखा प्रहार कइले बाड़ें। कविता के हर अंतरा के आखिरी पंक्ति—“केहू का थाही”—एह बात के रेखांकित करेला कि सच आ झूठ, नीति आ अनीति के बीच के रेखा धीरे-धीरे धुँधली पड़ गइल बा, आ आम आदमी असमंजस में जी रहल बा।…
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चंदेश्वर के कविता संग्रह ‘गोहार ‘पढ़ला-गुनला के बाद —
भोजपुरी में गद्य से शुरुआत करिके पद्य के दुनियाँ में उतरे वाला हिन्दी-भोजपुरी के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार चंद्रेश्वर जी के पहिला भोजपुरी कविता -संग्रह ‘गोहार ‘ के पढ़े से पहिले हम ‘कवि का ओर से दूर गो बात ‘ के पढ़े लगनीं।अपना एह आत्मकथ्य में कवि कविता के लेके कुछ साफ-साफ बतकही कइले बाड़न।उनकर कहनाम बा – 1-” कविता सच्चाइयन से जोड़ के मनुष्य-जीवन के एगो गति प्रदान करेले।××××× सभ्यता -संस्कृति के रचे-गढ़े में मय संसार में ओकर योगदान विशेष रहल बा।ऊ प्रेम आ प्रतिरोध साथ लेके आपन जय-जतरा प निकलेले।”…
Read Moreउचरत हरिनन्दी के पीर के बहाने से
हरिनन्दी भा हरनंदी अब ई नाम बिलम गइल बा। विरले लोग होई जेकरा के ई नाम के महातम मालुम होई। अंग्रेजन के दिहल अपभ्रंश नाम हिंडन से सबके परिचय बा। ई उहे हरिनन्दी नदी हई जे सहारनपुर के पास से निकल के आ चार सौ किलोमीटर चल के गौतमबुद्ध नगर माने नोएडा के पास यमुना से भेंट करेली। बाकि एह नदी पर जइसे राहू के साया होखे, आपन जनम स्थान से निकलते कईगो शहर के मैला आ कल-कारखाना के गाद अपना माथे ढोवे लागेली। देह गल के जइसे ठठरी हो…
Read Moreगंवईं माटी से गमकत कविता
समीक्षित पुस्तक: पीपर के पतई( भोजपुरी कविता संग्रह) कवि के नाम – जयशंकर प्रसाद द्विवेदी प्रकाशक – नवजागरण प्रकाशन, नई दिल्ली प्रकाशन वर्ष: 2017 पृष्ठों की संख्या -104 समीक्षक- डॉ राजेश कुमार ‘माँझी’ ई बात सबका मालूम बावे कि कविता मूल रूप से पाठक के भावना के उद्दात बनावेले, ओकरा सौंदर्य-बोध में सुधार ले आवेले आउर ओकरा के अपना परिवेश से जोड़ेले। कविता द्वारा पाठक में संवेदनशीलता आउर सुरूचि के भी विकास होखेला। कविता के भाव, विचार आउर शिल्प-सौंदर्य के उद्घाटन सही लय आउर प्रवाहपूर्ण ढंग से पढ़ला से…
Read Moreगीतकार डाॅ.गोरख प्रसाद मस्ताना आ उनकर गीत-कविता संग्रह-‘आस- अँजोर’
पटना दूरदर्शन में एही साल 26 जनवरी के बिहान भइला एगो भोजपुरी कवि-गोष्ठी के रिकार्डिंग रहे। हम तनिका लेट पहुँचल रहनीं ।पहिले से पता ना रहे कि आउर संगी कवि सभे में के-के बा बाकिर मिजाजे हरिअरा गइल जब देखनीं कि स्टेज पर चढ़े के बेरा दू गो नामी भोजपुरी गीतकार अग्रज -डाॅ.गोरख प्रसाद मस्ताना आ कुमार विरल जी साथे बानीं।ओह गोष्ठी के संचालक रहनीं वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी जी।भोजपुरी में जादेतर मुक्त छंद के समकालीन भाव-बोध से जुड़ल कविते लिखल हम चाहीले बाकिर दू गो गीतकारन के साथे हमहूँ…
Read More‘हो ना हो ‘ के कविता
जहाँ जीवन में चारू ओर अझुरहट आ तनावे होखे,मनई-मन में अकुलहट आ उबियाहटे भरल होखे ,उतावलापन, उबाल आ बेचैनिये समाइल होखे तब अइसनका समय में कविता में संघर्ष आ प्रतिरोध के स्वर स्वाभाविक बा।कविता मानव-मन के भावन के उच्छ्वास आ ओकरा माथा में उमड़त-घुमड़त सोच आ विचारने के कलात्मक अभिव्यक्ति होले।इहे कारन बा कि आज हर भाषा के कवितन में मौजूदा समय आ समाज के विसंगतियन, विद्रूपता आ चुनौतियन के बहुत मुखर वर्णन देखे के मिलत बा।लोकभाषा भोजपुरियो एकर अपवाद नइखे।देश,समय आ समाज के साथे डेग में डेग मिलावत चलेवाला…
Read Moreस्त्री संवेदना के धारदार कृति:निमिया रे करुआइनि
पुस्तक- निमिया रे करुआइनि विधा-उपन्यास / उपन्यासकार – मीनाधर पाठक प्रकाशन वर्ष-2024 /प्रकाशन संस्थान – सर्वभाषा प्रकाशन , नई दिल्ली -59 ‘निमिया रे करुआइनि’ स्त्री संवेदना के उनुका मन के मोताबिक आ उनुका स्थिति का हिसाब से गढ़ाइल बा। कथाकार अपना कथा-विन्यास के स्मृतियन से जोड़त रोचक बनावे में कवनों कोर कसर नइखे छोड़ले। एह उपन्यास के नायिका सुरसतिया (सुरसती) के करुणा आ दुःख भरल जिनगी के जतरा जवन मन,मेहनत आ देह के शोषण से होके गुजरल बा , ओकर नीमन से शब्द चित्र खिंचाइल बा। एही उपन्यास के…
Read Moreभोजपुरी कविता में रचल – बसल रस के मिठास से सराबोर एगो मजिगर पोथी
भोजपुरी कविता के इतिहास बहुत पुरान बा। बाबा गोरखनाथ आ संत कबीर के कवित के थाती त भोजपुरी कविता में बड़ले बा साथे ओह काल से लेके आजु तक भोजपुरी कविता समय के साथ कदम ताल करत कविता के हर विधा में आपन जोड़दार उपस्थिति दर्ज कइले बा। महेंद्र मिश्र, भिखारी ठाकुर, रघुवीर नारायण सिंह, प्राचार्य मंनोरंजन, महेंद्र शास्त्री से होत आजु तक के भोजपुरी कविता के यात्रा अपना भीतर बहुत कुछ समेटले बा जेकरा पर हमनीं भोजपुरिया के गुमान बा। भोजपुरी काव्य में का नइखे? राष्ट्र गीत, सिंगार गीत,…
Read Moreभोजपुरी कविता के राह में युवा कवि गुलरेज के ‘धाह’
भोजपुरी के युवा पीढ़ी के कविता में ताजगी त बड़ले बा बाकिर ओमें जवन उबाल आ आक्रोश के अभिव्यक्ति बा ओकरो में तल्खी ले जादे तथ्य आ समझदारी के प्रधानता बा।ई पीढ़ीअपना असंतोष,खीस आ नाराजगी के अपना संघर्ष,प्रतिरोध आ तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति के जरिए मुखर करे के जानेले।गुलरेज शहजाद एह पीढ़ी के एगो महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बाड़न। भोजपुरी कविता के दूनू रूप- प्रबंध आ मुक्तक काव्य में अपना प्रतिभा के लोहा मनवा देबेवाला कवि आज मौजूद बाड़ें।एह पीढ़ी में सुशांत कुमार शर्मा जइसन प्रबंध काव्य के रचयिता कवि अगर बाड़ें त अक्षय…
Read More“पढ़त -लिखत “: भोजपुरी आलोचना के कशमकश
भोजपुरी आलोचना में डॉ ब्रजभूषण मिश्र,डॉ विष्णुदेव तिवारी,डॉ सदानंद शाही आ डॉ बलभद्र के बाद डॉ सुनील कुमार पाठक एह सदी के तीसरा दशक में उभरत एगो आश्वस्तिदायक हस्ताक्षर बाड़न, हालांकि बहुत कम उमिर में ऊहां के भोजपुरी में एगो उभरत निबंधकार के रूप में आपन पहचान दे देले रहीं जब सन् 1985में”पाण्डेय योगेन्द्र नारायण छात्र निबंध प्रतियोगिता “भोजपुरी कविता के सामाजिक चेतना “विषय पर अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के 9वाँ राँची अधिवेशन में पंडित गणेश चौबे के हाथे प्रथम पुरस्कार ग्रहण कइले रहीं। सरकारी सेवा में गइला के…
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