काम

एकबेरा फिर से सोच ल रामसिंगार, काहेकि तू हउअ बाबू साहब ..तोहार बेटा बैंक में पार्ट टाइम काम कर ना सकी .. ग्राहक लोग के चाह- पानी पियावे के पड़ी । अउर भी छोट-मोट काम कुल करेके पड़ी साहब लोग से डाँट भी सुनेके पड़ी । बाबू बिनोदवा ई कुल काम करी ओकरा गांव से बाहर लिया जाईं डहेण्डल बनल फिरता ..हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाए लगले रामसिंगार .. साहब के आगा । साहब के मन पसीज गईल, नया-नया बैंक में नौकरी भईल रहे . पार्ट टाइम ‘वाटर ब्वाय’ राखेके पावर मिलल…

Read More

जमुऑंव के संत निराला बाबा

जमुऑंव गाँव (थाना- पीरो, जिला- भोजपुर) के लोग बहुते धारमिक  सोभाव के ह। जब से हम होस सम्हरले बानी तबे से देखतानी कि एह गाँव में पूजा-पाठ, हरकीरतन आ जग उग के आयोजन लगातार होत आ रहल बा। एह गाँव में साधुजी लोगन के बड़ा बढ़िऑं जमावड़ा भी होखत रहेला। मंदिर आ देवस्थानन से त गाँव भरल परल बा। कालीमाई, बड़की मठिया, छोटकी मठिया, संकरजी, जगसाला, सुरुज मंदिर, सतीदाई, बर्हम बाबा, उमेदी बाबा, गोरेया बाबा, पहाड़ी बाबा–। बात 1975 – 76 के आसपास के होई। बड़का पोखरा से पचीस-तीस डेग…

Read More

अवघड़ आउर एगो रात

रहल होई १९८६-१९८७ के साल , जब हमारा के एगो अइसन घटना से दु –चार होखे के परल , जवना के बारे बतावल चाहे सुनवला भर से कूल्हि रोयाँ भर भरा उठेला । मन आउर दिमाग दुनों अचकचा जाला । आँखी के समने सलीमा के रील मातिन कुल्हि चीजु घुम जाला । इहों बुझे मे कि सांचहुं अइसन कुछो भइल रहे , कि खाली एगो कवनों सपना भर रहे । दिमाग पर ज़ोर डाले के परेला । लेकिन उ घटना खाली सपने रहत नु त आजु ले हमरा के ना…

Read More

बुढ़िया माई

१९७९ – १९८० के साल रहल होई , जब बुढ़िया माई आपन भरल पुरल परिवार छोड़ के सरग सिधार गइनी । एगो लमहर इयादन के फेहरिस्त अपने पीछे छोड़ गइनी , जवना के अगर केहु कबों पलटे लागी त ओही मे भुला जाई । साचों मे बुढ़िया माई सनेह, तियाग आउर सतीत्व के अइसन मूरत रहनी , जेकर लेखा ओघरी गाँव जवार मे केहु दोसर ना रहुए । जात धरम से परे उ दया के साक्षात देवी रहनी । सबका खाति उनका मन मे सनेह रहे , आउर छोट बच्चन…

Read More

मई में माई चल गइल

“डभकेला मन के सपन, माई पसवे लोर । आस सेराइल जा रहल दुख के ओर न छोर।।”(सुकुपा)   ‘मातृदिवस’ के  छव दिन पहिलहीं एह साल  3 मई के माई विदा ले लिहलस।जब से एह दिवस विशेष के प्रचलन भारतो में खूब बढ़ गइल , माई के फोटो हम  फेसबुक पर डालल शुरु कर दिहनीं ।एह मौका पर हम माई से जब कहीं कि “फलनवा तोरा के परनाम लिखले बाड़ें” तब  ऊ कहे कि “तूहूं हमरा ओरी से आसीरबाद लिख दs।सब बाबू आ बबुनी लोग हंसी-खुसी  से रहो,सभे फलल-फुलाइल रहो।” अबकी…

Read More

बरहुआँ के श्री ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर

संसार मे अइसन कमे लोग होले, जेकरा हाथे नीमन काम होला, जवना से कीर्ति बढ़ेले। ईनार ,पोखरा, मंदिर, ईस्कूलन के बनवावल सभे के कल्यान खातिर होला।भगवान जेकरा हाथे ई सब करावल चाहेलन, उहे अइसन कुल्हि काम करे खाति अगराला। ओकरा जिनगी में ख्याति त  मिलबे करेले, ओकर लोक आउर परलोको  संवर जाला। धन- दउलत  त  ढेर लोगन के लग्गे होला, बाकिर  अइसन कुल्हि कामन खातिर  भुलाइयो के ना सोंच पावेला। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला मे एगो चकिया तहसील बा। सुरम्य वनस्थली जहाँ प्रकृतिं मनोरम छटा बिखेर रहल बा,अइसने सुघर…

Read More