भोजपुरी त पहेली बा

साँचो  में  रउआ सुन के भक फाट जाई। भोजपुरी एगो पहेली बन गइल बा ।नइहरे में बेआबरू भइल बेटी जइसन हाल एह घरी भोजपुरी साहित्य आ साहित्यकार लोगन के बा ।साहित्यकार कइगो मोटकी-मोटकी किताबन में माथा खापावेलन आ रात-दिन एक करके कलम-कागज के साथ मगजमारी (माथापची )करेलन तब जाके एगो रचना तइयार होला ।रचना एकजुट करेलन आ माल-पताई के जोगाड़ करके  भोजपुरी साहित्य  बनावेलन। ई भोजपुरी साहित्य के परेमवे नु बा । बाकी हद त तब होला कि सउसे छपल साहित्य भेट दे के सधावे के परेला। सउसे मेहनत फोकटे…

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वेलेंटाइन

उठ ना अब ले सुतल बाड़ू। जाड़ा पाला में का तंग कइले बानी ।बेर बिहान होखे ना दीं। सुरसतिया के माई जल्दी उठ आज हमार वेलेंटाइन ना बनबूं। रउवो आपन उमीर ना देखीं ।एह उमर में कबो रेखा तो कबो हेमा मालिनी के शौख जाग जाता।ई वेलेंटाइन कवन भूतनी के नाम ह ? कवनो नया हिरोइन पर नजर पड़ल ह का ?काल सुरसतियो कह तहे कि माई काल एक सौ रूपिया दिहे वेलेंटाइन दिन ह। आज कल के लइकन कहियो माई दिवस, कहियो बाप दिवस मनावते बाड़न सं बाकिर एह…

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अनन्त

*युगम- युगम अमर अनन्त रहे* *उ परेम रस भाखा भोजपुरी होखे* ई सोच, ई फिकीर हमरा अंदर काहे । कवना फायेदा खातिर। कवन लालच घेरले बा, समझ मे नइखे आवत।ई हमरा समझ से परे काहे बा।खुलल आसमान होखे। बदरी भा टटहात घाम होखे। दिन होखे चाहे रात होखे। हमेसा मन में चलत एकही बात बा। *जेपे करी तन, मन, धन बलिदान* *उ अनन्त मये भोजपुरी होखे* अइसन अनेको सवाल हमरा के चैन से बइठे नइखे देत।शुकुन के निन सुते नइखे देत। का हम निशा में रहत बानी।भा लोग जवन कहत…

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