चमकत चनरमा के जोती

आज हम बड़ा खूस बानी।पूछ काहे ???? हमरा ग‌ऊंआ में एगो बियाह बा।मलिकाइन कीहां…क दिन निमन से ख‌ईला भ‌ईल बा।अजुए राति ओही जा जाएम। पहिले से ना जाएम त ओहू जा बड़ा मारामारी बा।अधेसरा,नौलखिया,बटुलिया,सिकनरा..पहिलही से बोरा-झोरि ले के ब‌ईठल रहेले सन।सुने में आईल ह कि मछरी के भोज-भात बा।केतना मूड़ा पछिला बेर बिगाईल रहे।दू दिन मतारी बेटा ख‌ईनी सन।सरधवा त ख‌ईबे ना करेले।लागेले चिघरे-आई हो दादा!!कांट गड़ता। काल दोकाने कार करे ना जाएम।तनिको कुछू गबडा़एला बड़ा मारेलन सेठ‌ऊ।बाकिर उपाए का बा।हमार बाबू त कहियने ओरा ग‌ईले।दारू-ताड़ी पीयत पीयत टीबी उपटा…

Read More

बड़हन बानर हिरोइनची

ओह घरी पश्चिमी बिहार में हिरोइनचिअन के आंतक बहुत बेसी हो गइल रहुए, जदि भुला के बल्टी, तसला, रसरी, कुरसी, टेबुल भा सइकिल घर के बहरी भा बिना ओहारे अंगना में छूट जाए त दस पनरह रोपया खातिर मारल मारल फीरत हिरोइनचिअन के लाटरी लगले जइसन खुशी मिलत रहे। कसहूं चोरा के बेच खोच के दस पनरह रोपया में हीरोइन पी के रात भर टुन्न रह$सन।   एगो साहूकार आ बाबाजी पड़ोस में रहत रहुअन जा ,साहूकार के पांच गो छौड़ी आ बाबा जी के दू गौ छौड़ा रहे। साहूकार…

Read More

दू गो लघुकथा

१.बेटी के बियाह बेटी के बियाह खातिर चिन्तित महतारी अपना पतिदेव से कहली- एजी! रउरा बेटी के बियाह के कवनो चिन्ता बा की ना ? बेटी पढ़ि -लिख के पांच बरीस से नोकरीयो करऽ तिया, पैंतीस बरीस के उमीरो हो गईल। समय से शादी-बियाह कईल हमनीं के जिम्मेवारी बा बाकिर रउरा त कवनो फिकीरे नईखे। मेहरारू के बात सुनि के पतिदेव जी कहनीं- बेवकुफी मत करऽ। बबुआ इंजिनियरी पढऽ ता, दूसरा साल ह। अबहीं बियाह के बात टारऽ, काहां से आई हर महीना पच्चीस हजार रुपीया आ हमनीयों के आपन…

Read More

नदी आ बेटी

नदी आ बेटी के सिरजन भगवान धरती के सुनरी सरूप बदे बनवलन। धरती पर मनई के बसे आ जीये बदे ई दुनो जन  के अपना जीवन नेछावर करेके भेजलन। बेटी धरती पर मनई बसईली त नदी ओही मनई के जीवन दान दिहली ।खेती आ पानी के जुगाड़ के जिम्मा ई लिहली। ऐसही धरती फलत-फूलत आज एतना बड़ आपन संसार बना लिहली। खूब खूश होखे ई दुनो जन आपन एतना सुंदर सिरजन देख के। आज नदी बेकल बारी। उनका के सब लोग गंदा कर देत बा। उ आपन दुख केकरा से…

Read More

शराबबंदी

प्रदेश में शराबबंदी बा, शराब खरीदल-बेचल आ पियल प्रतिबंधित बा। बाकिर, एहि बंदी के आड़ में नया रोजगार खूब फरत-फुलात बा। पड़ोसी प्रदेश से शराब के तस्करी शबाब पर बा, पूरा के पूरा एगो रैकेट लागल बा। काल्ह फजीरहीं एगो शराब से भरल ट्रक सीमावर्ती थाना में जब्त भईल रहे, दिनभर खूब गहमागहमी रहे। आज थानेदार के हवाले से अखबार में खबर छपल कि एक हजार शराब के बोतल बरामद भईल बा। अब चर्चा ईहो बा कि पड़ोसी प्रदेश के सीमावर्ती जिला में शराब व्यवसायी के सदमा लाग गईल बा,…

Read More

फिर आया माई मोरे दुअरिया

मां, माई मे त पुरी दूनिया समाहित रहेले, माई से बड़ कुछ ना । जनम देवे वाली पालन पोषण करे वाली माइए  होनी। शास्त्रन में माई के उत्पत्ति मैं तीन कारण बतावल गयल ह पहला इच्छा दूसरा शक्ति अउर तीसर ह क्रिया। माई से अलग कोई भी ए तीनों चीज शामिल ना कर सके ना। इच्छा शक्ति अउर क्रिया क नाम ही जीवन ह ।  शारदीय नवरातर में आदि शक्ति श्री दुर्गा भवानी के  अंश अवतार का रूप मे  महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती इ तीनों शक्तियन के पूजा का विधान शास्त्रन…

Read More

मशीनीकरण बेरोजगारी

मंगला के मेहरी दुआरा पर बैठकर के गोबर के गोईठा बनावत रहे, तब ले गाँव के रिस्ता मे बुआ लगीहन उ ओकरा दुआरा पहुँचली। आउर मंगला के मेहरी के उदास चेहरा देख के बोलली। “रे पतोहीया काहे मुहँ लटका के बईठल बारिश रे। ई अवाज गाँव के एगो बुआ के रहे”। पहीले त पतोहीया उल्टा जबाब देवे के मुंड मे रहे लेकिन थोड़ा-सा बुढ़ बुजुर्ग के लेहाजे चुप-चाप बैठ के रह गईल। फिर भी बुआ ओकर मुहँ मे अंगुली कईल ना बन्द कईली। “दुर-हो, बोल देवे त खिया जईबे का”…

Read More

मजदूर के प्रेमकथा

मनोज एगो डेहारी मजदूर रहें। अभी-अभी नया साल में ही ओकर शादी भाईल रहें। मनोज के सब साथी आपन मेहरारु के साथे घुमे जात बारे वेलेंटाईन डे पर। मनोज भी सोचलस की हमू काहे ना आपन औरत के कही घुमावे ले जाई। मनोज एगो खुशीदिल इंसान रहें। ठेकेदार से पाईसा लेके मनोज प्लान बनाईलस कि 14 फ़रवरी के हम भी आपन औरत के बिग-बाजार घुमावे ले जाएम। ई बात सुन के मनोज के औरत बहुत खुश भईल और ऊ दुनू मियाँ बीबी बिग-बाजार घुमे खातिर गईले। मनोज के कहला पर…

Read More

बोरसी

घर में नाया सामान के अइला पर पुरनका के पूछ घट जाला कबो कबो त खतमें हो जाला , कमो बेस घर परिवार आ हितइयो के ईहे हाल होला जइसे जीजा के अइला पर फूफा के पूछ कम हो जाला, बेटी के होते बहिन के पूछ घट जाला ,नात नतकुर के होते आजा आजी पर फोकस कम हो जाला । ठीक अइसहीं अनदेखी क सिकार बेचारी ‘बोरसी’ देवी भी भइल बाड़ी। हीटर आ ब्लोवर के अइला से बोरसी देवी घर से बहरे क दीहल गइली, एकाध जनी बचल बाड़ी त…

Read More

बुधिया

गाड़ी टेसन से अबही छूटल ना रहेल सवारी अपने मे अरूझायल हउए । केहू सूटकेस मे चेन लगावत ह,त केहू आपन बेग के सही करत ह,त केहू आपन सीट न. खोजत बा।तबही धच – घचक करत गाड़ी आगे बढै़ लगल । तब ले वहीं मे से केहू क अवाज सुनाईल ,इंजन लग गयील अब गाड़ी थोड़कीय बेर मे चली।चाय ले ला…..चाय।कुरकुरे दस रूपिया….दस। कहत चायवाला डिब्बा में घुसल। अबही गाड़ी अपने पुरे रफ्तार में आवै, बुधिया खिड़की के पास बैइठ गइल।बहरे पलेटफारम छोड़त आगे बढ़त गाड़ी क चाल समझै लगल…

Read More