भाषा खाली बतकही के जरिया ना होला, बलुक ई कवनो समाज के आत्मा, संस्कृति, इतिहास आ सामूहिक चेतना के ढोअल करे वाली शक्ति ह। भारत जइसन बहुभाषी देश में हर भाषा आपन एगो अलग संसार समेटले बा। भोजपुरियो ओही में से एगो समृद्ध लोकभाषा ह, जवन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड से निकल के मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद जइसन देशन ले फैल गइल बा। लगभग 20–25 करोड़ लोग भोजपुरी समझेला या बोलेला। बावजूद एह सब के, आज ई भाषा आपन घरे में आपन आस्तित्व के संकट से जूझत बिया। सबसे बड़…
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भोजपुरी: संवेदना, संघर्ष अउर समता के भासा
भोजपुरी के नाम आवते आजु ढेर लोगन के मन में पहिल छवि “लोकप्रिय गीतन” के उभरेला ऊ मंच, मेला, सिनेमा अउर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बाजत चटर पटर गीत के, बाकिर ई हमरा समझ से अधूरा सच्चाई ह। भोजपुरी के असली माने, ओकर आत्मा, ओकर सांस्कृतिक गहिराई अउर मानवीय संवेदना के विस्तार एह सतही छवि से कहीं जादे व्यापक बा। भोजपुरी ना त खाली “मौसमी” गीतन के भासा ह, न खाली मनोरंजन के साधन; ई संघर्ष, करुणा, त्याग, समर्पण, श्रम, वियोग अउर मुक्ति के जियत-जागत सांस्कृतिक दस्तावेज ह। त्याग अउर समर्पण…
Read Moreभोजपुरी गीतन में होली वर्णन
भोजपुरिया धरती उत्सवधर्मी धरती ह। भोजपुरिया लोकजीवन मुख्य रूप से खेती-किसानी पर आधारित बाटे ना, त मेहनत मजदूरी पर। भोजपुरिया लोकजीवन के हर एक परब त्योहार कृषि से जुड़ल बाटे। एह त्योहारन में होली-फगुआ के त कहहीं के का बा?घर के कोठिला में घान-चाउर भरल रहेला, बघार में गेहूँ गदरात रहेला,आम-महुआ मोजरात रहेला आ सरसो पिअर रंग फुलाए लागेला,त समझीं बसंत आ गइल बा। किसान-मजदूर देख-देख हरखित होला आ बसंत पंचमी से शुरू होखे वाला होरी के उत्सव अबीर खेल के शुरू करेला आ लगभग चालीस दिन तक एह…
Read Moreफगुआ के लोक-दर्शन : राग से विराग तक
फगुआ के आगमन होतहीं प्रकृति आ मनुष्य दुनो एक साथ बउरा उठेले। खेत में पीयर सरसों के मुसकान, आम के मंजर, हवा में घुलल सुगंध, चिरई के चहचह —ई सभ जीवन के भीतर छुपल ऊर्जा के नया रूप में जगा देला। मैथिली के महाकवि विद्यापति लिखलेन— “आइल ऋतुपति राज वसंत, धावल अलि कुल माधवी पंत।” बसंत के राजसी छटा खाली मौसम के बदलाव ना, बलुक विज्ञान से लेके मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सौंदर्यशास्त्र आ आध्यात्मिकता तक के गहिर ताना-बाना में गूँथल बा। फगुआ–होली भारत के समेकित जीवन-अनुभव के रंग-बिरंग उत्सव ह, जेकरा…
Read Moreभोजपुरी लेखन आ प्रकाशन-2025
भोजपुरी साहित्य आ संस्कृति के विकास के दिसाँई भोजपुरी समाज निरंतर प्रयासरत बा।भोजपुरी- विकास खातिर दर्जनन भोजपुरी संस्था लगातार कार्यक्रम आयोजित करत रहल बाड़ी सँ।साहित्यकार -कलाकार-राजनेता सभे अपना ओर से भोजपुरी के विकास खातिर हर संभव प्रयास कर रहल बा।भोजपुरी साहित्य के विकास के दिसाँई सबहर रचनात्मक प्रयास चल रहल बा।हर तरे के बिधन में विविध विषय-वस्तु पर रचनाकार लोग कलम चला रहल बा।अश्लीलतापरक गायन के मुखर विरोध हो रहल बा।सार्थक आ सोद्देश्य गायकी के सराहना मिल रहल बा।धीर-धीरे अश्लीलता आ जातीयतापरक गायन के प्रतिरोध में समानान्तर रूप से आज…
Read Moreबिहारी मजदूर : एगो कविता: एगो व्याख्या
जब एगो कविता अपना छोटहन कलेवर में एगो मार्मिक परिवेश आ मनुजता के एगो बड़हन पीर-क्लेश के चित्र उगाहे आ बिना ठकठेन नधले साँच के तहे-तहे खोल के बतावे तब ऊ कविता साहित्य के बड़हन विभूति हो जाई, एमे कवनो शक नइखे। डॉ ब्रजभूषण मिश्र के रचल ‘बिहारी मजदूर’ अइसने काव्य-विभूति ह, जे साँझ के उदासी से उगत बा आ जिनगी के साँझ के झाँक देखा के बिसइ जात बा। कविता के शुरुआत अइसे होत बा- रोजे-रोज जुटेलन स स्टेशन पर बिहारी मजदूर झुंड के झुंड, जवना के हाँकेला एगो…
Read Moreभोजपुरी भाषा के मानकीकरण’, ‘ओकर शब्दन के एकरूपता’
‘भोजपुरी भाषा के प्रमाणिक रूप’, ‘भोजपुरी भाषा के एकरंगी रूप’, भोजपुरी भाषा के मानकीकरण के आवश्यकता’ जइसन विषय पर समय समय पर विद्वावनन के विचार आइल। भोजपुरी के मानक रूप के तैयार करे के प्रयास लगातार चल रहल बा। कहे के ना होई कि भोजपुरी साहित्य के सृजन सिद्व आ नाथ पंथ, कबीर पंथी, भगताही आ सरभंग सम्प्रदाय के संत भक्त कवियन के ‘बानी’ से शुरू भइल। बाकिर साहित्यिक रूप में भोजपुरी भाषा के निर्माण पिछला 100 साल से हो रहल बा। जब भोजपुरी साहित्य के निर्माण शुरू भइल तब…
Read More‘कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइले…’
आजु रामजियावन दास ‘बावला’ जी के जयंती हऽ। ‘बावला’ जी, लोकमन के कवि रहलें। कुछ विद्वान लोग उहाँ के ‘भोजपुरी के तुलसीदास’ कहले बा। बाकिर हम उहाँ के तुलना कवनो दोसर कवि से ना करऽब। ‘बावला’ जी के कवनो प्रतिमान नइखे हो सकऽत। कवनो पैमाना भा कसउटी पऽ उहाँ के नइखे तउलऽल जा सकऽत। काहें कि उनका जइसन केहु भइले नइखे। उहाँ के तुलना, उहाँ से ही हो सकऽता। ‘बावला’ जी से पहिला भेंट हमके इयाद बा। पर, पहिलका छवि हमरे मन में कइसन अंकित भइल? सहजमना। सोझ। गँवई औदार्य…
Read Moreएगो मनसायन
[नमन भर से काम ना चली।पढ़ीं -जानीं -सोचीं सभे अपने पुरखन के बारे में] भोजपुरी कवि विचित्र जी ,मुँहदुब्बर जी आ मुखिया जी के इयाद करत ~~~~~~~~□□~~~~~~~~~~~~~ भोजपुरी के स्वनामधन्य कवि स्व.कुबेर मिश्र ‘विचित्र ‘ जी आ राघवशरण मिश्र ‘मुँहदुब्बर’ जी ओह बेरा भोजपुरी कवि- मंचन के जान-परान रहनीं।मुँहदुब्बर जी आ विचित्र जी ई दूनू जने जब एक मंच पर जुट जाईं तब फेर पूछहीं के का रहे! हमरा इयाद बा छपरा नगरपालिका मैदान में ‘तुलसी पर्व’ के आयोजन में हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ कवि आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी आ केदारनाथ…
Read Moreभोजपुरी कविता के राह में युवा कवि गुलरेज के ‘धाह’
भोजपुरी के युवा पीढ़ी के कविता में ताजगी त बड़ले बा बाकिर ओमें जवन उबाल आ आक्रोश के अभिव्यक्ति बा ओकरो में तल्खी ले जादे तथ्य आ समझदारी के प्रधानता बा।ई पीढ़ीअपना असंतोष,खीस आ नाराजगी के अपना संघर्ष,प्रतिरोध आ तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति के जरिए मुखर करे के जानेले।गुलरेज शहजाद एह पीढ़ी के एगो महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बाड़न। भोजपुरी कविता के दूनू रूप- प्रबंध आ मुक्तक काव्य में अपना प्रतिभा के लोहा मनवा देबेवाला कवि आज मौजूद बाड़ें।एह पीढ़ी में सुशांत कुमार शर्मा जइसन प्रबंध काव्य के रचयिता कवि अगर बाड़ें त अक्षय…
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