बलम परधानी लड़ाके

खा गइल बचल – खुचल पानी बलम परधानी लड़ाके। एक भइल संझिया बिहानी बलम परधानी लड़ाके।। नइहर से अइनी त दुल्हिन कहइनी भुइयां ना डेग हम दुउरे में धइनी । आज सँउसे गँउवे के रानी बलम परधानी लड़ाके…. कहेला लोग दिन तिरिया के आइल मरद – मेहरारु बराबर कहाइल। अब तु ही अगोरिहs चुल्हानी बलम परधानी लड़ाके… खा गइल बचल – खुचल पानी बलम परधानी लड़ाके… भसुरा आ देवरा बराबर बुझाला ओटवा बड़ावे ऊ संघे – संघे जाला। अगराइल पेन्ट – मरदानी बलम परधानी लड़ाके…. खा गइल बचल – खुचल…

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तमासा घुस के देखै

लख लतखोर कहाय, तमासा घुस के देखै॥ सौ सौ जुत्ते खाय, तमासा घुस के देखै॥   इनका उनुका बहकावे में नाटो क खिचड़ी पकावे में जेलस्की इतराय, तमासा घुस के देखै॥   गावत फिरत देस के गीत संहत  छोड़ि परइलें मीत बइडेनवा मुसकाय, तमासा घुस के देखै॥   बरसे लगल रसियन मिसाइल खड़हर सहर मनई बा घाहिल खूनम खून नहाय, तमासा घुस के देखै॥   मानवता के नारा कइसन नैतिकता क पहाड़ा जइसन कबौं बदल ऊ जाय, तमासा घुस के देखै॥   के बा नीक, नेवर के बा फयदा केकरा…

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गाईं कइसन लोरी

आगि लागल बा मन में बोताईं कहां, सुतल हियरा के फेरु से जगाईं कहां।   कुछ कहला प छन दे छनकि जाले उ, सांच बतिया के लोरी गवाईं कहां।   उ पवले का पद भूलि जा तारे हद, अइसन दरद प मल्हम लगाईं कहां।   देवे के उपदेश उन्हुका आदत परल, हिम्मत रउवे बताईं कि पाईं कहां।   देखीं जेकरा के फफकल उताने भइल, भाव के भरल ई खटिया बिछाईं कहां।   करी कतनो हम आस मिले केहु ना खास, दिल में उगल अंजोरिया देखाईं कहां।   पवनी जेकरा के…

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नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ के भोजपुरी उपन्यास ‘विजय पर्व’ के मिलल अभय आंनद पुरस्कार

मोतिहारी : राधा कृष्ण सीकरिया बीएड कालेज में आयोजित अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के 26 वां अधिवेशन दू दिवसीय 26-27 फरवरी के सम्पन्न भइल। सम्मेलन के उद्घाटन माननीय श्री मंगल पाण्डेय स्वास्थ्य मंत्री बिहार सरकार कइनी। मुख्य अतिथि गन्ना उद्धोग मंत्री माननीय श्री प्रमोद कुमार, विशिष्ट अतिथि माननीय संजय मयूख बिहार विधान परिषद सदस्य, श्री वीरेंद्र नारायण यादव बिहार विधान परिषद सदस्य आदि उपस्थित रहीं। भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करे खातिर पूरा भारत वर्ष से आइल हजारों भोजपुरिया भाई-बहिन एक स्वर में सरकार से मांग उठवले।…

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फागुन में नाचल

हंसि हंसि क बहार उतान भईल, अगराई के फाग जब फागुन में नाचल ।   फगुआ के जब आगुआन भईल, अबीर-गुलाल आपना सुघर भाग पे नाचल।   बबुआ-बुचिया के जब रंग रंगीन भईल , फिचकारी के संग उछल- कुद के नाचल ।   बुढा-जवान के भेद सभ भुल गईल , फागुन फगुआ के जब मधुर तान पर नाचल।   आपन-आन के सब ध्यान गईल , जब बैर तेज के सब केहु गले मीली नाचल।                उमेश कुमार राय ग्रा0+पो0- जमुआँव , जिला- भोजपुर (बिहार )

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भोजपुरी त पहेली बा

साँचो  में  रउआ सुन के भक फाट जाई। भोजपुरी एगो पहेली बन गइल बा ।नइहरे में बेआबरू भइल बेटी जइसन हाल एह घरी भोजपुरी साहित्य आ साहित्यकार लोगन के बा ।साहित्यकार कइगो मोटकी-मोटकी किताबन में माथा खापावेलन आ रात-दिन एक करके कलम-कागज के साथ मगजमारी (माथापची )करेलन तब जाके एगो रचना तइयार होला ।रचना एकजुट करेलन आ माल-पताई के जोगाड़ करके  भोजपुरी साहित्य  बनावेलन। ई भोजपुरी साहित्य के परेमवे नु बा । बाकी हद त तब होला कि सउसे छपल साहित्य भेट दे के सधावे के परेला। सउसे मेहनत फोकटे…

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विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ अरुणेश नीरन सम्मानित भइलें

विश्व भोजपुरी सम्मेलन संस्था खाति हुलास आ  गौरव के बाति बाटे कि अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2022 के अवसर पर भोजपुरी प्रतिष्ठान,बीरगंज,नेपाल के तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में विश्व भोजपुरी सम्मेलन संस्था के अंतरराष्ट्रीय महासचिव आदरणीय डॉक्टर अरुणेश नीरन जी के भोजपुरी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान का चलते अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान कइल गइल । सम्मान स्वरूप ₹100000 नगद,स्मृति चिन्ह एवं उत्तरीय प्रदान कइल गइल।

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बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो

ठुनुक़त घरवाँ अंगनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। अरे हो बिहँसत माई के परनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो।   मुँहवा लपेटले मखनवाँ बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। अरे हो उचकि उतारत अयनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो।   हुलसत गरवा लगावेली अरे हो भरले लोरवा नयनवाँ , बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो।   रोआँ पुलकि जिया हरसेला अरे हो कुंहुकेला मन अस मयनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो।।     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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वसंत अइले नियरा

हरसेला हहरत हियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मन में मदन, तन ले ला अंगड़ाई, अलसी के फूल देख आलस पराई, पीपर-पात लागल तेज सरसे, अमवा मोजरीया से मकरंद बरसे, पिहू-पिहू गावेला पपीहरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मटरा के छिमिया के बढ़ल रखवारी, गेहूँआ के पाँव भइल बलीया से भारी, नखरा नजर आवे नजरी के कोर में, मन करे हमहूँ बन्हाई प्रेम-डोर में, जोहेला जोगिनीया जियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। पिया से पिरितिया के रीतिया निभाएब, कवनो बिपत आयी तबो मुस्कुराएब, पोरे-पोर रंग लेब नेहिया के रंग में,…

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सारधवा

मरछिया अपने त सात गो लइका के मार कै भइल रहै .. जनमते महतारी घुरा पर फेकवा दिहली ..कौदो दे कै किनली ..बड़ा टोटरम पर .मरछिया जिएल ..मरछिया धीरे-धीरे सेयान होखे लागल ..जवानी उफान मारत रहे ..”इजवानी केकरा कस  में बा ..मरछिया एकदम गोर भभुका रहे रहे ..आओठ लाल-लाल ..नकिया सुग्गा के ठोर अइसन चोख ..अँखियांमें बुझाए काजर कईल बा ..केसिया टेढ़ टैढ़ घुंघराला  बुझाए करिया घाटा ह..माने छाछाते देवी कै मूरत ..देह के उतार चढ़ाव गजब के .. चाल मस तानी ..चोटिया नागिन खनिया  अँखिया बुझाए दारु पियले बिया…

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