गजियाबादी नगर निगम हौ

लूट खसोट मचवलें प्रतिनिधि जन सुविधन पर गिरल सितम हौ। गजियाबादी नगर निगम हौ॥ मेयर की तो बात न पूछो लूट रहल सौगात न पूछो ठिकेदारन के ज़ेबा भइया इनका खातिर अति सुगम हौ। गजियाबादी नगर निगम हौ॥ निगम के पिछे कचरा के ढेरी लूटे खातिर लगत हौ फेरी शिकायत कइला पर भइया जिनगी ससुरी भइल ज़ुलम हौ। गजियाबादी नगर निगम हौ॥ सड़कन पर गढ़्ढन के लाइल अन्हियारा विकास के साइन मोहल्लन में गटर के पानी इनका खातिर चलत फिलम हौ। गजियाबादी नगर निगम हौ॥ लगल करै स्वक्षता के नारा…

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‘साहित्य आज तक’ के महोत्सव सम्पन्न

‘साहित्य आज तक’ के तीन दिन के समारोह बीत गइल।’साहित्य आज तक’, भा ‘आज तक’ भा इंडिया टूडे ग्रुप के ई बहुते सुखद आ सराहे जोग पहल रहल। शुरुवतिए से जवन टीका-टिप्पड़ी चले लगल रहल, तवन अभियो चल रहल बा। कुछ लोग रजनीगंधा के स्पानसरशिप के लेके कार्यक्रम के क्रिटिसाइज करत देखाइल आ कुछ लोग साहित्यकार चयन के लेके क्रिटिसाइज कर रहल बा। सभे के आपन-आपन तर्क बा, आपन-आपन विचार बा। जे घोड़ा पर चढ़ेला, ओकरे गिरे भा सँभरे के संभावना पर बात होले। आज बाजारवाद के समय ह, जवन…

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सचहूँ; ‘फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया’

संस्मरण हिन्दी साहित्य के एगो अइसन गद्य बिधा ह जवन अपनी स्मृति प आधारित ह। कई बेर ई अत्यंत व्यक्तिगत भी होला आ सामाजिक चाहे राष्ट्र से जुडल भी। बाकिर केतनो व्यक्तिगत संस्मरण होखे, ई गद्य साहित्य के बिधा कहाला। जदि देखल जा त हिन्दी के संस्मरण लेखक लोग के एतना नाँव बा जे लिखल जा त एगो बड़हन सूची तैयार हो जाई। बाकिर भोजपुरी के ई पहिला संस्मरण से हमार भेंट भइल ह ‘भोजपुरी साहित्यांगन’ पर। ‘फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया’ किताब के ई शीर्षक अपनी ओर आकर्षित करता।…

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डॉ राजेश माँझी के संपादित पुस्तक के लोकार्पण सम्पन्न भइल

*फ़ीजी उच्चायोग में ‘फ़ीजी में हिंदी : विविध प्रसंग’, डॉ राजेश माँझी के संपादित पुस्तक के लोकार्पण सम्पन्न भइल जवना के संचालन के भूमिका रिंकल शर्मा जी निभावनी। पुस्तक लोकार्पण समारोह में महामहिम फ़िजी उच्चायुक्त श्री कमलेश प्रकाश जी, पापुआ गिनी के उच्चायुक्त , गुयाना के उच्चायुक्त श्री चरनदास परसुआद , मुख्य अतिथि विदेश मंत्रालय सचिव श्री युकेश कुमार बत्रा रहलें आ  प्रमुख वक्ता लोगन  में डॉ. विमलेश कांति वर्मा (पूर्व प्रथम सचिव, भारतीय उच्चायोग, फ़ीजी); श्री रविन्द्र प्रसाद जायसवाल (संयुक्त सचिव-हिन्दी, विदेश मंत्रालय); डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, इंदिरा…

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लोकतन्त्र के लास जरी

जब मनई मनई के आस जरी बूझीं, लोकतन्त्र के लास जरी।   गली गली भरमावल जाई उलटबासी  पढ़ावल जाई आइल फिर चुनाव के मउसम फुटही ढ़ोल मढ़ावल जाई। कवनो बहेंगा, फिरो गरे परी । बूझीं, लोकतन्त्र के लास जरी।   लागत हौ दिन बदलल बाटे एही से अब लउकल बाटे जनता के हौ जनलस नाही उनुके बेना हउकत बाटे। अब घरे घरे जाई, गोड़ परी। बूझीं, लोकतन्त्र के लास जरी।   जात क लासा धरम क लासा गढ़ि गढ़ि के नवकी परिभाषा केहु क गारी केहु क गुन्नर देहल जाई…

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हलिए आ रहल बा-‘धक् से लागल बात बावरी’

भोजपुरी  के चर्चित कवि आ भोजपुरी साहित्य सरिता के संपादक जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के नया काव्य संग्रह ‘धक् से लागल बात बावरी’ प्रेस में जा चुकल बा। उमेद बा कि नवंबर 2022 में प्रकाशित हो के लोक में आ जाई। ई द्विवेदी जी के 5 वीं किताब बाटे।

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घरे-घर खुशियां मनाव,दीया खुशी के जलाव

घरे-घर खुशियां मनाव,दीया खुशी के जलाव घरे-घर खुशियां मनाव, बात अब ई फइलाव धरा बचावे खातिर बबुआ,अब त तू आगे आव अब ना छोड़ बम पटाखा, कीरिया आज उठाव दुखियन के गले लगाव… दीया खुशी के जलाव घरे-घर खुशियां मनाव………. ना खाएब ,मेवा मिठाई, ना खाएब बाजार के आपन घरे बनाएब आज,रोकब भ्रष्टाचार के बिजली के खूब बचाव… दीया खुशी के जलाव घरे-घर खुशियां मनाव……….. दीन दुखी गरीब के साथे, बाटंम खुशियां दू चार जेतना संभव होई भइया, देहब हम लार दुलार बूढवन के गले लगाव… दीया खुशी के जलाव…

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हमहूं आजु दरिद्दर खेदब

हमहूँ आजु दलिद्दर खेदब, घुमि घुमि सूप बजाइब हो।, कहियै कै सोवलि किस्मत बा, ओके आजु जगाइब हो।। सूप बजावत पुरखा लोगवा, बदहाली में मरि गइलैं, घुसुरल जवन दरिद्दर बइठल, हमरे माथे थरि गइलैं, पकरि के टेटा ओहि कुकुरे कै, गड़ही ले दउराइब हो।, कहियै कै सोवलि किस्मत बा, ओके आजु जगाइब हो।। जेकर नाँव अकाशे दउरे, केतना सूप बजउले होई, कउने जोजन से ऊ अपने, भगिया के चमकउले होई, भगै दरिद्दर हमरे घर से , जुगुती उहै लगाइब हो।, कहियै कै सोवलि किस्मत बा, ओके आजु जगाइब हो।। लालबहादुर…

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फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया के बहाने से :

पछिला कुछ बरिस में भोजपुरी में लेखन फेर से अँगड़ाई ले रहल बा। भोजपुरी में लेखन पहिलहूँ खूब भइल बा। हर विधा में थोर-ढेर किताब लिखाइल बाड़ी सन। चूँकि पठनीयता के अभाव आ कवनो सरकारी सहजोग के बेगर भोजपुरी के किताबन के उपलबद्धता के लेके सभे के सब कुछ पता बा। कारन इहे बा कि भोजपुरी के किताब लेखक लो अपना जेब से कटौती क के करावेला आ अजुवो कमोबेस हालत कवनो ढेर बदलल नइखे। बाकि परेसानी आ विश्वसनीयता के लेके सोचल जाव त अब बहुत कुछ बदल चुकल बा। …

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भोजपुरिया समाज में ‘भिखारी ठाकुर’ होखला के माने-मतलब

एगो अइसन समाज जहवाँ लइका जनम का संगही पलायन अपना भाग के लिखनी में लिखवा के आवत होखे,जहवाँ आँख खोलते बाढ़, सुखाड़,गरीबी,भुखमरी आ अशिक्षा में सउनाइल समाज लउकत होखे,जात-पाँत, ऊंच-नीच, छुवाछूत, शोषण का संगे लइका बकइयाँ चलल सीखत होखे, जहां दू-जून के रोटी कुछे लोगन के समय से भेंटात होखे, जहवाँ लइकइयाँ से सोझे बुढ़ापा से भेंट होत होखे आ जहवाँ अमीरी गरीबी का बीचे बहुते गहिराह खाईं होखे, अइसन समाज अजुवो आपन लोक,संस्कार आ संस्कृति जोगावत चलल आवत बा, त कुछ न कुछ त खासे होखी।उ समाज अपना भीतरि…

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