बरसे बदरिया

नन्‍हीं–सी गुड़िया के गोदिया उठवलैं लोरिया सुनाय नैन निदिया बलवलैं अँगले में झरैला दुलार हो बाबा मोर आवैं बखरिया॥ नेहिया की छँहियाँ में गुनवाँ सिख्‍वलैं बचपन से बड़पन उमिर ले पढ़वलैं नेहिया कै भरल भंडार हो बाबा मोर आवैं बखरिया॥ दुखवा उठाइ धरे सुखवा बिछउलैं हँसि हँसि के सबही के नेहिया लुटउलैं मोहिया भरल बा अपार हो बाबा मोर आवैं बखरिया॥ कविता के रस होला सँझिया बिहनवाँ गउवाँ के गितियन में बसैला परनवाँ गीतन से करैलें सिंगार हो बाबा मोर आवैं बखरिया॥   हरिराम द्विवेदी, वाराणसी

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