ए… बालम!

फूल झरै तोहरे बोलियाँ ए…बालम । तब तौ कहेय हम कुंईयाँ न खोदबैय अब काँहे पनिया भरायेव… ए…बालम । तब तौ कहेय हम खेती न करबैय अब काँहे कटनी कटवायेव… ए…बालम । तब तौ कहेव हम सेजिया न सोईबैय अब काँहे कुण्डी लगायेव… ए…बालम । – श्लेष अलंकार

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गीत

दिन धोइ साफ करे नभ इसलेटिया तारा गीत लिखि चान करे दसखतिया। तारा के पढ़ी तरई हो करुन कहानियाँ लिपि अनजान मुँहे नाही बा जबनियाँ देखे के बा खाली ओरि अन्त हीन गीतिया ।तारा लोग कहे लोक यह आँख का सिवान में छोट बड़ निगिचा आ दूर आसमान में हम कहीं नाहीं ई करेजवा के बतिया।तारा जिन ताकअ तरई आ चान ई बेमारी ह हम कहीं देखे द सुकून के इयारी ह उठत बनत नाहीं लागे असकतिया। तारा आनन्द संधिदूत ।

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माई जइसन होली माई

सारी, झुमका, टिकुली खातिर मेहरि करे लड़ाई। बाइक खातिर रूसल लरिका, हिस्सा खातिर भाई। स्वारथ साधत हीत-मीत सभ जे के आपन बुझनीं, बबुआ काहें मुँहवाँ सूखल पुछलसि खाली माई। माई जइसन होली माई। चढ़ल उधारी घरखरची के, करजा लेइ दवाई। कबहूँ सूखा, कबो बाढ़ि से खेती गइल बिलाई। सबहिन जाने हूक हिया के, पलटि हाल ना पूछे, उरिन काहि बिधि बबुआ होइहें ? गहिर सोच में माई। माई जइसन होली माई। धइ माथे पर हाथ असीसे आँखिन लोर बहाई। अँचरा से पोंछे लिलार के देव-पितर गोहराई। बबुआ हो दुबराइल बाड़S,…

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अइहें नू चान

कब अइहें अटरिया प चान कि मनवाँ झवान हो गइल। अँगना में आस के बिरवा लगवलीं। कतिने ना लोभ-मोह जुगत जुगवलीं। पसरल हजारन बितान, त छतियो उतान हो गइल। पारि रेघारी रचेलीं असमनवाँ, खँचियन जोन्ही आँकीं, सीतल पवनवाँ, अगनित सपन उड़ान, सभनि के जुटान हो गइल। घरियो भ चुरुआ में सुख का समाला? जतिने समेटीं तले गरि-गरि जाला। भइल ह मन हलकान, सँचलको जिआन हो गइल। कारी अन्हियरिया के अनगुढ़ बतिया। रहता अजानल ह पगे-पगे घतिया। साँसत में परल परान, जिनिगिया धसान हो गइल। कब अइहें अटरिया प चान कि…

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सरस्वती बंदना

जय हो मइया शारदा, होसवा बिसारी द। हम निरगुनिया अधम अभिमानी तोहरी किरितिया के कइसे बखानी मोह अगियान सब जरी से उजारी द। जय —   अरगवों के गोदी मे उठवलू नाही जानी हमरा के काहे बिसरवलु कि हमरो के खोली के पलकिया निहारी द। जय —   केहु ना सहायी माई तोहके पुकारी राति दिन तोहरे डगरिया निहारी कि हमरो दुआर कबों हंस के उतारि द। जय —   चारु ओर छवले गहन अंधिअरिया जाईं कहा सूझे नाही कवनों डगरिया कि हिया बीचे दिया तनि ज्ञान के तू बारि…

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चेतावनी पाकिस्तान के

अइसन पड़ोसी मिलल,निपटे अनाड़ी धीकल। सीजफायर तुड़ के,बढ़ावत हमार खीस बा।। खइला- छइला बिनु टुटल,चीन के हांथे बा बिकल। भाड़ा के गोहार प, बनत चार-सौ-बीस बा।। बने ला अमीर चंद,घर में करे मुसरी दंड। भोजुआ तेली बनत, भोज महाराज बा।। करजा में डुबल आकंठ, तबहुं अतना घमंड। एटम बम के धमकी से,लोग के डेरावत बा।। लुकी-छीपी करे घात,लात के देवता ना माने ना बात। आईके सीमा पररोज, रेड़ ई बेसाहता।। पंच के सुनेना बात, करे राड़ दिन रात। असहीं बिनास आपन,अपने बोलावता।। धरती के स्वर्ग पर,पपियन के भेजी कर। नरको…

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चुनउवा

सोझवें ओकतिया बतावेला चुनउवा नीमन-बाउर खेल खेलवावेला चुनउवा॥ कटिया करवावे,खेते खेत घुमावेला लहनी सरिआई के बोझ बनवावेला गउवाँ में चकरी पिसवावेला चुनउवा॥   तारु आ तरवा, दूनों पिराये लागल मन के उछाह, घामे थिराये लागल सबही से छिपनी धोवावेला चुनउवा॥   मुंहवाँ सुखाइल बाटे, ओठवा झुराइल कई घरी बीतल, पनियों ना भेंटाइल दिनही में चनरमा देखावेला चुनउवा॥   हाथ ज़ोरवावेला गोड़ धरवावेला टुटही मड़इया आ दुवरा देखावेला तिनगी वाला नाच नचवावेला चुनउवा॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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जय शिव शंकर

बसहा बैलवा के शिव क के सवारी, तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारि।   औघड़ दानी हउँए सभका से उ निराला, जटा में गंगा मइया गरवा में सर्प माला। कष्ट मिटावे सभकर हउँए उ पापsहारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   क्षण में बना उ देले क्षण में बिगाड़ देले, खुश होले जब भोला सभ कुछ भर देले। धन दौलत सुख शांति देले घरs अटारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   कुपित होले जब उ खोलेले तीसरा अखियाँ, काँपे लागेला सभे केहूँ नाही पारे झकियाँ। मातल रहेले खाके…

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साँझवा बिहानवा

तहरे में डुबल रहेला साँझवा बिहानवा, तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   हटे के ना चाहेला हो सोझवा से ताहरा, एतना लगाव तोहसे भइल कइसे गाहरा। हामारा प देई दना तनिसा तू धेयानवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   व्याकुल रहेला हरदम मिले खाती तोहसे, करेला लड़ाई हरमेश तोहरा खाती हमसे। बदलs इरादा अबो सुन लs वचनवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   खुशी बहुते मिलेला हो तोहरा के देखी के, दीपक तिवारी कुछो कह तारे लिखी के। करs विचार ना त ले लs…

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बसंती बयार

उड़ावेला निन्हिया बसंती बयार हो। काँहा बाड़, सईंया हमार हो। उठेला दरदिया अपार हो। छछनत जिअरा कोईली पुकार हो। जलदी से आजा सुना घर संसार हो। टूटेला अंगे अंग बसंती बयार हो। मन करे तेज दी आपन परान हो। आजा सईंया रजऊ गणपति यार हो। बाड़ा तड़पावे बसंती बयार हो। गणपति सिंह छपरा Jp Dwivedi LikeShow more reactions

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