गाजियाबाद के भोजपुरी साहित्यकार के मिलल पं धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान

गाजियाबाद के सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के उनुका पहिलका भोजपुरी कविता संग्रह ‘पीपर के पतई’ खातिर सर्वभाषा ट्रस्ट का ओरी से पं धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान से नवाजल गइल। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिला जवन भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण स्थली का रूप मे जानल जाला, उहवें गत 23 मार्च के सर्व भाषा ट्रस्ट, ‘जर्नलिस्ट्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन’ आउर ‘नवप्रभा मंच’ के संगे भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण स्थली, अज्ञेय के जन्म-स्थली, कुशीनगर में ‘पं. धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान 2018’ के आयोजन भइल रहे। ओही समारोह में ई सम्मान विधायक रजनीकान्त…

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“पीपर के पतई” भोजपुरी सांस्कृतिक चेतना के काव्य संग्रह ह

जयशंकरप्रसाद द्विवेदी के काव्यसंग्रह- पीपर के पतई, के हम भोजपुरीसांस्कृतिक चेतना के संग्रह काहे कहले बानी, इ एही लेखा नइखे कहल गइल. एह संकलन में 65 गो कविता बाड़ी सन. भोजपुरी के आउर दूसर कवि लोगन लेखा द्विवेदी जी माई सुरसती के गोहरवले बानी, बाकिर दुसकरी कविता “अइसने घरवा”के पढ़ते कवि के भाव समझ में आ जात बा आखिर ओकरा कहे के का इरादा बा. भोजपुरी समाज में परिवार कइसे बिखरत बा एकर बानगी ह इ कविता – “तुनक के बबुआ मत बतियावा सभकर अइठन छूटल अइसने घरवा फुटल” देखल…

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“पीपर के पतई ” नागपुर मे

अबकी बेर के यात्रा खूब सुखद रहे । एह यात्रा मे आपन किताब “पीपर के पतई” नागपुर में आदरणीय श्री नितिन जी गडकरी के अपने प्रिय श्री राम प्रकाश मिश्रा जी के संगे भेंट कइनी ।भेंट के संगे भोजपुरी भाषा के मान्यता ला चर्चा भइल ।

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ऑक्सीजन से भरपूर ‘पीपर के पतई’

कहल जाला कि प्रकृति सबके कुछ-ना-कुछ गुण देले आ जब ऊहे गुण धरम बन जाला त लोग खातिर आदर्श गढ़े लागेला। बात साहित्य के कइल जाव त ई धरम के बात अउरी साफ हो जाला। ‘स्वांतः सुखाय’ के अंतर में जबले साहित्यकार के साहित्य में लोक-कल्याण के भाव ना भरल रही, तबले ऊ साहित्य खाली कागज के गँठरी होला। बात ई बा कि अबहीने भोजपुरी कवि जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी के पहिलकी कविता के किताब ‘पीपर के पतई’ आइल ह। ई किताब कवि के पहिलकी प्रकाशित कृति बा बाकिर ऊहाँ…

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