आपन आछो-आछो आ दोसरा के छिया-छिया

का जमाना आ गयो भाया,बड़बोल बोलवन के भाव-ताव के कवनो ठेहा-ठेकाना के हेरल संभव नइखे। कवनो गली-मोहला, गाँव-शहर, नगर-डगर अइसन जगह नइखे जहवाँ एहनी के प्रजाति काबिज ना होखे। सगरों कुंडली मार के बइठल बाड़न सन। सभले बेसी सभे कुछ एहनिये के चाहत बा। ओकरा खातिर कुछो करे के तइयार बाड़न सन। छीछालेदर करे से लेके रइता फइलावे तक में एहनी के आपन करतब बुझाता। अपने सनमान खाति केहुओ के आगु खीस निपोरत बेरा छाती चाकरे राखल ओहनी के सोभाव में बा भा कहीं कि खुने में मेझराइल बा। नीमन…

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