कविता आ कुदार हाथ में दुओ लिआइल

धन्य रहे धरीक्षण मिश्र जस लोग , जे भोजपुरी के अपना अभिव्यक्ति के माध्यम बनावल । ओह लोग का अपना महतारी भाषा खातिर कवनो हीन भावना ना रहे ,आ ऊ लोग भोजपुरी के भाषिक शक्ति से खूबे परिचित रहे । मिश्र जी के काल हिन्दी आन्दोलन के काल रहे । भोजपुरी क्षेत्र के लोग भोजपुरी के अनदेखी करत,दरकिनार करत हिन्दी सेवा में लागल रहे । आजो बहुत लोग हीन भावना से ग्रसित बा आ चाहत बा कि भोजपुरी लोकेसाहित्य तक सीमित रहे ।  मूर्खतापूर्ण तर्क से ई लोग भोजपुरी के…

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