नन्हकी के माई

आज भोरही से मड़इया में  खुबे आवाजाही  लागल बा। नन्हकी के माई आज अकवार से बाहर निकल जात बिया। बड़की चाची  जब खिसियास त उ घरी तनी घुघटा के  सरका के कहस- ए अम्मा!  बहरिया कोई ना रहल ह। आ नन्हकी के कबे से कहतानी सुनते नईखे।त हाली हाली निपटारा करे खातिर …………. एतने में – ‘अच्छा ठीक बा। जा घरे ‘बड़की चाची के  ऐलान सुनते भीतर चल गईली। ए नन्हकी ! सुन ! साबुन से  बढिया से मुँह धोके पउडरवा तनी लगा लीहे। अबकी तोर मुँहवा साफा लागता ।…

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