जोन्ही के बियाह

रोज के तरह आज भी बटुन चाचा अपन सब्जी के ठेला पर के समान बेच के घर लौट के चपाकल पर मुंह हाथ धोवत रहे. उनकर मेहरारू किचन में से जाके उनका खातिर भोजन तैयार कर के लियाइली. दिनभर के हारल थकल बुटन चाचा टबुल फैन के पास बैठ के ठंडा ठंडा हवा की लुफ्त उठावे लगले. उनके हृदय में ई वक्त जवन शकुन रहे ऊ ठीक उलटा उनका घर में धीरे धीरे अशांति अपान पैर पसारे लागल रहे जवना के ऊ दूनो मियाँ बीवी के अंदाजा भी ना रहे.…

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पुवरा के ओढ़ना

भीषण ठंड के मौसम बा। अईसन ठंड लागत बा की खून जम के बर्फ हो जाई। पाँच साल के मनोज हाथ गोर सेकुड़वले एगो टुटल खाट पर ठिठुरल रहे। जब अब मनोज के ठंड बर्दाश्त ना भईल त धीरे-धीरे कुल्ह-कुल्ह के रोवे के चालु कईलस। मनोज के माई धान पिटत रली त उनका मनोज के रोवे के आवाज सुनाई देहलस त ऊ मनोज से पूछली “काहे रोये लगलीस” मनोज आपन तोतलाई आवाज में बोललस “बहुते ठंडा लागत बा।” माई के हृदय कचोट गईल तब ई दृश्य देख के मनोज के…

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कौआ के रिवाज

गाँव मे गजब गजब के लोग रिवाज निभावेला। कभी कभी ई रिवाज जानलेवा बन जाता तब लोग पश्चात के रह जाला। आज भी गाँव मे लोग आजादी के 70 साल बाद भी ई अंधविश्वास के संका मे डुबल बा कि कवनो अनर्थ ना हो जाए। हम ई कवनो  भगवान और खुदा के बात नईखी करत। हम ई आच्छा तरीका से जाना तानी के भगवान और खुदा के इबादत कईला से मन और दिल के शान्ति मिलेला पर कुछ अईसन रीति-रिवाज के लोग पालन करत आवाता की जवना से भगवान और…

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