भोजपुरी साहित्य क पारस : पं. धरीक्षण मिश्र

जब से सृष्टिकर्ता सृष्टि के रचलें तब से भाव अउरी विचार के अभिव्यक्त करे के मानवीय लालसा अलग अलग रूप में जनम लेहलस । मुंशी प्रेमचंद जब ई कहत बाड़े कि जवना साहित्य से हमरा में रुचि ना जागे, आध्यात्मिक अउरी मानसिक तृप्ति ना मिले, हमरा में गति अउरी शांति पैदा ना होखे, हमरा मे सौन्दर्य प्रेम ना जागृत होखे, जवन हमनी के सच्चा संकल्प अउरी कठिनाई पर विजय पावे के दृढ़ता उत्पन्न ना करे, ऊ हमारा ला बेकार बाटे अउरी ऊ साहित्य कहलावे के अधिकारी नइखे । बात अगर पंडित धरीक्षण मिश्र के होखे…

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