मांगलिक गीतन में प्रकृति-वर्णन

लोक-जीवन में आदमी के सगरो क्रिया-कलाप धार्मिकता से जुड़ल मिलेला। आदमी एह के कारन कुछू बुझेऽ। चाहे अपना पुरखा-पुरनिया के अशिक्षा आ चाहे आदमी के साथे प्रकृति के चमत्कारपूर्ण व्यवहार। भारतीय दर्शन के मानल जाव तऽ आदमी के जीवन में सोलह संस्कारन के बादो अनगिनत व्रत-त्योहार रोजो मनावल जाला। लोक-जीवन के ईऽ सगरो अनुष्ठान, संस्कार, व्रत, पूजा-पाठ, मंगल कामना से प्रेरित होला। ई सगरो मांगलिक काज अपना चुम्बकीय आकर्षण से नीरसो मन के अपना ओर खींच लेला। एह अवसर पर औरत लोग अपना कोकिल सुर-लहरी से अंतर मन के उछाह…

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इनरा मर गइल

कहीं होत होई नादानी बाकिर हमरा गाँवे त इनरा के पानी सभे पीये सबके असरा पुरावे इनरा तबो मर गइल ई परमार्थ के पुरस्कार का भइल? समय के साथे लोग हुँसियार हो गइल इनरा के पानी बेमारी के घर लागे लागल लोग रोग-निरोग के बारे में जागे लागल। लोग जागे लागल आ इनरा भराए लागल लइका-सेयान सभे कुछ-कुछ डाले इनरा के सफाई के बात सभे टाले, अब साँस अफनाए लागल इनरा के लोग ताली बजावे लागल कि अब केहू बेमार ना होई। आज हाहाकार बा पानी खातिर बात बुझाता अब…

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