गीत

गूहि-गूहि टांग दीं अंजोरिया के पुतरी लछिमी गनेस के असीस घरे उतरी। एगो दिया गंगा जी के एगो कुलदेव के एक गउरा पारबती भोला महादेव के एक दिया बार दिहअ तुलसी के चउरी। सासु के ननद के समुख बूढ़ बड़ के गोड़े गिर सरधा समेट भूंइ गड़ के खींच माथे अंचरा लपेट खूंट अंगुरी । लाई-लावा संझिया चढ़ाइ बांट बिहने अन्नकूट पूजि के गोधन गढ़ि अंगने गाइ-गाइ पिंड़िया लगाइ लीप गोबरी । धनि हो अहिन्सा हऊ पाप-ताप मोचनी घर के सफाई मुए मकरी – किरवनी लोग पूजे अंवरा खिआवे सेंकि…

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बरखा गीत

बदरी बदरी बा नयनवां जाने कब बरसे ओरियाव हो अंगनवां जाने कब बरिसे। ढांप दिह लय धुन ढांप दिह गीतिया ढंपिह पथार लेखा पसरी पिरितिया ढंपिह अच्छर गियनवां ओठे कहनी कथनवां हाथे दूनो दरपनवां जाने कब बरि से। बदरी0   जिन मेहराये सांसतोहरो उछहिया ओरा बोराओढ लीह जिनगी के रहिया झारदीह कुण्ठा कथनवां कइले मनगर मनवां रखिह अपनों धियनवां जाने कब बरिसे।बदरी0   ढहेजिन फूल पातसुघर सपनवां फेरि दीहहंसी खुशी अपनों भवनवां बइठअ एक खनकोनवां धइलअ सोचे के समनवां दूगो लकड़ी लवनवा जाने कब बरिसे। बदरी0     आनंद संधिदूत…

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