पुजारी जी के तोता

एगो रहन पुजारी जी. ऊ एगो सुग्गा पोसले रहन. रोज़ नियम से कथा-प्रवचन सुने जात रहन एगो महात्मा जी के कुटिया में. सुगवा रोज़ सोचे कि हमार मलिकवा रोज कहाँ जात बा भाई. एक दिन टोक देलस. पुछलस कि रोज़-रोज़ कहाँ जाइला रउआ नहा-धोआ के? पुजारी जी बतवलन कि एगो बहुते सिद्ध महात्मा जी बानी, उहाँ के जीव के मुक्ति के उपाय बताइला, हम उहाँ के प्रवचन सुने जाइला. सुगवा कहलस कि तनी हमरो बारे में पूछब ना कि हमरा एह बंदी जीवन से कब मुक्ति मिली? पुजारी जी कहलन…

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गजल

घना कोहरा बा मुसाफिर तबो का रुकी केहु आखिर? कहीं आसरा ना उदासल, जतन के कहानी ह जाकिर। तहर आँखि देखल ह साँची, हमर साँच कइसे ह काफिर। जुबानी लफाजी अकारथ, सुनी ले कि गूंगा ह शाकिर। हमूँ हँइ ईस्सर के वारिस, हमूँ खुदमुख्तार नाजिर। फिसादी त कहिए चिन्हाइल, ब-हस्ती जथावत ह बाकिर। रहे दीं अकारथ ह गावल, हियाँ कौन बंदा न जाबिर? [जाकिर- बरनन करेवाला। बुद्धिमान। काफिर-नास्तिक। शाकिर- संतोषी। नाजिर – देखरेख करेवाला। जाबिर- खुराफाती, अत्याचारी।] दिनेश पाण्डेय

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ऐतिहासिक पुस्तक बाटे ‘आजादी के लड़ाई आ जुझारू भोजपुरिया’

प्रख्यात साहित्यकार डॉ. अर्जुन तिवारी कवनो परिचय के मोहताज़ नइखें आउर ना त उनुकर साहित्यिक जोगदान। भोजपुरी साहित्य के समृद्ध करे वालन में उनुकर  नाम गरब के संगे लीहल जाला। भोजपुरी साहित्य का इतिहास, भोजपुरी शब्दकोश जइसन अनेक किताबियन के रचना कइले बाड़ें। सर्व भाषा ट्रस्ट प्रकाशन से उनुकर एगो किताबि ‘आजादी के लड़ाई आ जुझारू भोजपुरिया’ आइल ह। डॉ. अर्जुन तिवारी के हालिए प्रकाशित किताबि ‘आजादी के लड़ाई आ जुझारू भोजपुरिया’ में भोजपुरी मिट्टी के रणबाँकुरन आउर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियन के बरियार चर्चा त बड़ले बा, किताबि में भोजपुरिया…

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प्रगतिशीलता इहे होला का ?

भाषा सब अइसन भोजपुरी साहित्य में बेसी कविते लिखल जा रहल बा. दोसर-दोसर विधा में लिखे वाला लोग में शायदे केहू अइसन होई, जे कविता ना लिखत होई. एही से कविता के जरिये भोजपुरी में साहित्य लेखन के दशा-दिशा, प्रवृति-प्रकृति के जानल-समझल जा सकत बा. साहित्य आ साहित्य के शक्ति के बारे में एगो श्लोक भरतमुनि कहले बाड़े – नरत्वं दुर्लभं लोके विद्वत्वं तत्र दुर्लभम्. कवित्वं दुर्लभं तत्र शक्तित्वं तत्र दुर्लभाः . कविता आ काव्य शक्ति के जे हाल होखे भोजपुरी में कवि आ लेखक के भरमार बा. एही भरमार…

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भोजपुरी में बाल साहित्य

प्राचीन काल में भोजपुरी बिहार प्रांत के भोजपुर, आरा ,बलिया, छपरा, सीवान, गोपालगंज आ यूपी के कुशीनगर, देवरिया गोरखपुर, महराज गंज ,सिद्धार्थ नगर, मऊ , आजमगढ़, गाजीपुर आ बनारस के भाषा रहे बाकिर अब्ब आपन भोजपुरी एगो अंतर्राष्ट्रीय भाषा हो गइल बाटे । भोजपुरी खाली भारत के बिहारे यूपी  के भाषा ना रहिके नेपाल , मॉरीशस, फीजी, गुआना, सूरीनाम जइसन देशन में भी बोलचाल के भाषा के रूप में फइल गइल बा । भोजपुरी भाषा में सभ तरह के साहित्य रचल जा रहल बा बाकिर बाल साहित्य के नाम पर…

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