चार यार

चार गो यार रहे लो, रामु, कालु, बिकेश, शेरु। सब लोग आपन आपन बात हकले रहे लो..। रामु कहलन,”ए यार हमरा भीरी गाड़ी बा, घर बा, दुआर बा, तहरा लोग के लगे का बा”। अब कालु कहलन, ” ए यार लोगन, हमरा लगे खुब रुपया बा, पइसा बा,तहरा लगे का बा”। अब बिकेश के बारी रहे, उ कहलन, “ए यार सुन सन , हमरा लगे पढ़ाई बा,ज्ञान बा, हम कुछउ कर सकीला, तहरा लगे का बा”। अब लास्ट में शेरु के बारी रहे। शेरु आपन शर्ट के बटन खोललन, तब…

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किताब

बरहवीं क रेजल्ट आवे वाला ह किसना सुबेरेवै से भीतर-बाहर करत बा,खन मे कक्का केहन त खन मे माई केहन,मन ही मन आगे का होई यहू बात से डेरात ह,फेल त ना होइब,लेकिन अच्छा रिजल्ट आ जायी त विश्वविद्यालय में पढ़ब हे बजरंग बली निकै सबद सुनाया। रजवा घराने क रघवा समने से आवत देखायल,हे किसना कहवाँ जात हउए,!चल जल्दी चल रिजल्ट निकल गयल हउए।चट्टी पर चलल जाय वही अखबार आयल होई, चल दउड़ के चल।किसना अउर रघवा एक सांस में चट्टी पर पहुंच गइनै, दूनो अखबार में मूड़ी गड़वलै…

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माटी क जाँता

कातिक पुन्वासी क दिन सबेरवै से साफ सफाई मे लगल रहली।छुट्टी क दिन रहेला त अउर काम बढलै जाला, अबही कपड़न के घाम देखावै के बा ।चारू अक्षत गरे से लिपट गइनै । “अम्मा घूमे चला।” ” कहवाँ चली हमार राजा बेटा” “माल चला न।” अच्छा ठीक बा….। हमार चार साल क बेटा के माल जाये के नशा सवार रहेला। हमहू जैइसे -तइसे काम समेट के दोनो बच्चन के लेके चल दिहनी।शहर मे भीड़-भाड़ बढ़लै जाला।सबके जल्दी जाये क अइसन होड़ मचल रहेले की पुछा मत। बनारस क जाम त…

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कुशिआरी

बिआह-समंध बड़ी टुनकाह चीझ ह जी! सुरुए से सइ-सइ बीपत। कबो नाइ मँझधार में नापता हो जाला त कबो कचारे में मरा जाला। ते प कुश काका जइसन करजिब्हा अदिमी गाँव में रहस त सरबनासे बूझीं। असहूँ कहल जाला कि जेकर खेत में कुशिआरी निपज जाय ओहि गिरहस्त के सात पुहुत तक अन्न के दरसन ना करि पइहें। नीसन शहतीर अस गाँव में लागल घुन रहे ककवा, जवन तरे-तरे पूरे गाँव के रेसा-रेसा भुरकुस क दिहले रहे। बतकटी, पिनुकाही, गरपराही, कुभाखन, चुगलर्इ, र्इ सभ अइसन ऐगुन-गिरोह रहीसँ जवन उनुका में…

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भुनेसर भाई के ठेकुआ

जिउतिया आवे से महिना भर पहिले से ठेकुआ के नाम जपत बाड़े भुनेसर भाई. काल जिउतिया त बित गईल लेकिन सोमेशर भौजाई एके ठेकुआ माने कि खाली ओठंधन से ही भेंट होखे देले बाड़ी भुनेसर भाई के. बाकी ढ़ेरे मनी ठेकुआ बना के सिकहर पर धर देले बाड़ी कि भोरे जेतना मन करी, खा लेम. भुनेसर भाई के रात कटले नईखे कटात कि कब भोर होखे आ ठेकुआ के भोज कईल जाव. उ आँख खोलत बाड़े तबो भा बंद करत बाड़े तबो आँखीं के सामने ठेकुए लउकत बा. हमरा लागत…

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बबुआ ला पिचकारी

रंग-बिरंग अबीर-गुलाल के दुकान लाईन से सजल रहे। लोग आपन लाईकन ला पिचकारी रंग के खरीदारी करत रहे। उहे बजार में एगो दस साल के छोट लाईका पीठ पर कबाड़ के बोरी टांगले दुकान सन के सामने से कई बार गुज़र चुकल रहे। कबाड़ बीनल त ओकर एगो बहाना रहे ऊ त मासूम आपन ललचाई नजर से पिचकारी और रंग-अबीर-गुलाल के देखत आवत जात रहे। मुंशी काका भी आपन दुकान पर बईठ के ई लाईका के देखात रले। अंत मे मुंशी काका से रहल ना गईल त ऊ पूछ बाईठले-…

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बोरसी

घर में नाया सामान के अइला पर पुरनका के पूछ घट जाला कबो कबो त खतमें हो जाला , कमो बेस घर परिवार आ हितइयो के ईहे हाल होला जइसे जीजा के अइला पर फूफा के पूछ कम हो जाला, बेटी के होते बहिन के पूछ घट जाला ,नात नतकुर के होते आजा आजी पर फोकस कम हो जाला । ठीक अइसहीं अनदेखी क सिकार बेचारी ‘बोरसी’ देवी भी भइल बाड़ी। हीटर आ ब्लोवर के अइला से बोरसी देवी घर से बहरे क दीहल गइली, एकाध जनी बचल बाड़ी त…

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“माई माईए होखेले

“माई माईए होखेले , केतनहुं बड़ हो जा , कुछु क ल , भले जग काहे ना जीत ल लेकिन ओकर नज़र में तू बच्चा ही रहब, ओकर फिकर करे के आदत कबहुं ना जाला” :- रमेश इ सब बात सोचत-सोचत तेज़ी से घर के तरफ बढ़लन । रात के नौ बजत रहे आ उ अभी ले शहर में ही कवनो काम में उलझल रहलन । माई के फोन आइल रहे कहत रहली “आव घरे हम तोहार उपाय लगावतानी , तू नू साफा बिगड़ गईल बाड़ । भला हेतना रात…

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कोठेवालियाँ

रानी के बियाह क बड़ा.शोर ह बरात बलिया से आयील ह,दश दिन पहिलवै से टेंट तम्बू लगै शूरू हो गयल ,अरे होहि के चाहि आखिर तहसीलदार साहब क पहिली बेटी बिहल जात बा,दुआरे क रौनक त देखतै बनत बा।तहसीलदार साहब खूदै हर चीज क निगरानी करत हउए।खूटा गाड़े बदे बास चाहत ह ,उदया लगत बा किआज कुल बसवरिय काट घली,इ उदया सुसुरा तहसीलदार के देखैला चार पोरसा ऊपर चढ़ जाला।अउर आज त रमेशो (तहसीलदार क भाय)आवैके हउए।रमेश बहुत दिलदार मनयी हउए ,ओनके बारे मे का-का बतावै…जब उ पढ़ै जा ओनकर…

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पियSकड़वा यार

हमार गाँव के तीन यार रले। सुखन मियाँ,  रुबिन मियाँ , साधु पासवान। तीनो मे बहुत दोस्ती रहे। तीनो एके साथ ईटा पाथे चेमनी पर जा सन और एके साथे ईटा पाथ के चेमनी के पथेरी से वापस आवसन। अगर कवनों दोस्त के ईटा पाथे मे देरी हो जाए तS तीनो एक दुसरा के मदद कके जल्दी जल्दी एके साथे ईटा पाथ के चट्टी पर पहुँचत रले सन। जब तीनो यार चट्टी से वापस पैदल आवसन तS केहु माई के लाल ना रहे जे ऐ ई तीनो से बतीया लेव।…

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