चलीं बात करे के

का जमाना आ गयो भाया,बात करे के परिपाटी फेर से उपरिया रहल बा। बुझाता मौसम आ गइल बा,मोल-भाव करे के बा, त बतकही करहीं के परी। बिना बतकही के बात बनियो ना सकत। ई चिजुइए अइसन ह कि एकरे बने-बिगरे के खेला चलत रहेला। बात बन गइल होखे भा बात बिगर गइल होखे, दुनहूँ हाल मे बात के बात मे बात आइये जाले। हम कहनी ह कि एह घरी मौसमों आ गइल बा,बाकि इहाँ त बेमौसमों के लोग-बाग मन के बात करे मे ना पिछुआलें। जब बात उपरा गइल बा…

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कुक्रांद

चौंकि गइनी़ नू ई नाम सुनिके? देश में बनेवाला हजारन दलन में ई एगो दल के नाम ह, जवन अबे नये बनल ह। ओइसे त ई दल बने  आ बनावे के विचार कई साल से चलत रहल ह, लेकिन कई अड़चनन का बावजूद ई रजिस्टर्ड पाटी होइए गइल बा। भइल ई कि कुछदिन पहिले फुलेसर आ भुवर के कुक्कूर आपस में लड़ि गइले सन। समय बीतल, ओ कुक्कूरन में इयारी हो गइल, लेकिन फुलेसर आ भुवर में लाठी- लउर निकलि गइल आ आजु ले बोलोचाल बन बा। उहे कुक्कूरा रोज…

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शेष भगवान जाने ——-!!

का जमाना आ गयो भाया, टँगरी खींचे के फेरा में ढेर लोग अझुराइल बाड़ें। उहो काहें बदे, एकर पता नइखे, बस खींचे के बा, सरेखल बा लोग आ आँख मून के खींच रहल बा। आगु चलिके एकर का फायदा भा नोकसान होखी, एकरा ला सोच नइखे पावत। आला कमान के कहनाम बा, सेकुलर दादा कहले बाड़ें, एही सब के चलते हो रहल बा। अब भलही टँगरी खींचे के फेरा मे खुदे गड़हा गिर के कनई मे लसराए के परत होखे। ओहमे कवन सुख मिल रहल बा भा आगु मिली,पता नइखे।…

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सगरों झोले झाल बा का जी?

                      का जमाना आ गयो भाया , जेने देखी ओने लाइने लाइन लउकत बा। सभे केहू लाइन मे ठाढ़ ह, चुप्पी सधले आ भीतरे भीतर अदहनियाइल। कतना बेबस लउकत बा मनई, तबों दम बन्हले, हुलास आउर जजबा से भरल-पूरल। आगु आवे वाला दिन नीमन दिन होखी एकर बाट जोह रहल बा। कथनी आउर करनी मे उपरियात थोर बहुत नीमन पल के हेरे के भागीरथ परयास करत आम आदमी, तभियो जय जय क रहल बा। वाह रे , जमाना  ! ई…

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टोंटी आउर धोबियापाट के जतरा

का जमाना आ गयो भाया, सभे भाई लोग कुछ ना कुछ उखाड़े-पछाड़े मे लाग गइल बाटे। अखाड़े के रसूख खाति “धोबियापाट” कबों ना कबों लगवहीं के पड़ेला। जब सभे दाँव फेल हो जाले सन, त “धोबियापाट” के सहारा बचेला। फेर मौका आ दस्तूर देखि के “धोबियापाट” दे मारेलन पहलवान लोग। अखाड़ा मे लड़े से पहिले पहलवान लोगन के दिमाग मे एकर जोजना बनि जाले। आखिर अखाड़ा के इज्जत के सवाल उठि जाला। आ इजत खाति त इहवाँ मडर हो जाला। एह घरी सभे एक मुस्त एक्के जोजना पर काम क…

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परिभाषा माने जवन हम गढ़ी………!

का जमाना आ गयो भाया, अब मनई लोग के बजार लाग रहल बा। दोकान सजा – सजा के लोग बइठल बा, खरीदे वालन के इंतजार हो रहल बा। जेकरा नइखे बेचे के, ओकर मालिक लोग पहाड़े हाँक देले बा अपने मवेसियन के। राशि एकही बा मवेसी आ मनई के। अपने हिसाब से बूझ लीहल जाव। हम बड़का, हम बड़का के हो – हल्ला चारु ओरी मचल बा। केकरो चैन नइखे, जे चैन मे बा, ओकरो चैन मलिकार लो छीने मे लाग गइल बा। कुछ के त छीनियो लेले बा। जेकरा…

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अंतरात्मा के आवाज

का जमाना आ गयो भाया, कुरसी के लड़ाई मे साँच के बलि दिया गइल। सत्यमेव जयते लिखलका पत्थरवा लागत बा कवनो बाढ़ मे दहा गइल। तबे नु एकर परिभाषा घरी घरी बदल रहल बा। पहिले दिन कुछ आउर आ दोसरा दिन कुछ आउर। अपना देश मे एकर बरियार सुविधा बा जवन कबों केकरो आवाज के अंतरात्मा के आवाज मे पलट देवेले। बाकि एह आवाज के निकाले खाति ढेर पापड़ बेले के पड़ेला। पापड़ बेल देले भर से कबों काम ना चले, त ओह पर कुछ छिड़के के पड़ेला,घाम देखावे के…

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बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना

का जमाना आ गयो भाया , “बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना” कूल्ही ओर फफाये लागल बाड़न सs। पतरी पर छोड़ल खइका खइला के बाद जइसे कुकुर अइठत चलेलन सs, ओइसही इहवों ढेर लोग चल रहल बाड़ें । का कहीं महाराज , दोकान – दउरी बन्न होए के अपसगुन देखाए लागल बा । फेर त “उपास भला कि पतोहू के जूठ” , जियल जरूरी बा त पतोहिया क जूठवों के साफ आ मीठ बुझही के परी नु । खइला के बाद पतोहिया के गोड़वों पुजही के परी नु । पुजाइयो रहल…

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साधो देखो जग बौराना

‘ ए गुरु ! सुनला ह न कन्हैया क भाषण,का बोललस पट्ठा जानदार, शानदार, जबरदस्त।एकदम तबियत हरियर हो गयल।ए साह जी एहि बात प एगो स्पेशल चाय पिआवा भाय।’ नन्हकू कन्हैया कुमार क भाषण सुनके बहुत खुश रहलन अउर चाहत रहलन कि सबही ओ खुशी में लवलीन हो जाय बाकिर केहू नन्हकू क मन क साध पूरा करे के तैयार ना रहे। ‘हमके त कुल भाषण में एक्के गो बतिया निम्मन लगल ए नन्हकू।’ एक जाना के बोलते नन्हकू हुलस के लहरे लगलन – ‘कवन हो चच्चा ,तनी सुनी ?’नन्हकू ए…

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होलिका फुंकले क का फायदा

‘ ए बचवा! एना पारी होलिका जी क मूर्तिया ना आई का हो।परसाल त एतना सु्ग्घर मूर्ती रहल कि देख के जियरा जुड़ा गयल।होलिका माता केतना सुग्घर लगत रहलीं। उनके गोदी में बइठल उनकर लाल क सोना नियन मुंह देख के अपने टीटुआ क याद आ गयल रहे।’ बेकहला फुआ कॉलोनी के मोड़ पर होलिका बदे लकड़ी सहिरावत लइकन से पूछत रहलिन कि नन्हकू बिच्चे में कूद गइलन- ‘ए फुआ होलिका कब ले माता हो गइलिन हो।जानत हऊ न कि ऊ के रहलीं ..।’अबहीं नन्हकू फुआ क जनरल नॉलेज टेस्ट…

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