पन्द्रह अगस्त मनावल जाई

झूठ साँच के लेवा गुदरी फूँकि पहाड़ उड़ावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   बबुआ भइया सुन ए बचवा ढरा गइल सब एके संचवा लक़दक़ सजल आवल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   भाँवरि घूमल बिहने बिहने अरजी फरजी के का कहने कबों बिचार बनावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   अरखे के कुल भाव-कुभाव केकर केकर देखब सुभाव सब गुड़ गोबर गावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   मरे जवान भा मरे किसान माथे जरिको न पड़े निसान निकहे ढ़ोल बजावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   बेरोजगार चरम…

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सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ

तिरंगा के कहनी में बा जोश इहवाँ कहाँ बाचल बाटे होश चोरवे खोजत बाड़े सन चोर गली-कूचा में चालू गस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   बिला रहल बाटे जवान-किसान नीक के बाटे, सभै परेशान माजा लूटल कुछ लोगिन के बा बाकि त इहवाँ, सबही त्रस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   आपुस मे कतना बाटे राड़ कतौ सूखा बाटे कतौ बाढ़ इहाँ के मनई क दशा दिशा का दिल्ली में भइया सभै मस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   गोरका…

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का फरक …?

बाति त जवन बा तवन बा बाति त इहे बा जवन हम लिखेनी भा छापेनी। बाचल-खुचल के कुछो बूझीं बलुक ओकरो से कुछ बेसी बूझीं हमरे दीहलका गियान सगरों बघारेले हम चिघ्घारिले त उहो चिघ्घारेले।   ओइसे जहवाँ तक राउर नजर जाई सब अपने बा दोसरा के सपने नु बा रहो ? का फरक ….? अइसन कुल्हि ढेर देखले सुनले बानी लोग चिचिआई,छिछिआई फेरु चुपा जाई फेर त हमरे नु कहाई पगड़िया त हमरे माथे नु बन्हाई ?   फलाने के चीजु ढेकाने अपने नाँव से छापें भा गावें चाहे…

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अंजुरी भर अंजोर

ए चान अंजोर कई द उग के रात,भोर कई द।   लरकोरि के लरिका रोवे टुकुर टुकुर सरग निरेखे माई गावे मीठी लोरी तबो ना उ सोवे चांदनी से बिभोर कई द ए चान अंजोर कई द।।   दिन में काहे छिप जाल बोल केकरा से डेराल रात में आके तनि के करे ल तारन प राज आजु काहे बाड़ लुकाईल कबेसे दे तानी आवाज।   तनिका तु धेआन देई द दूर आँख से लोर कई द उग के रात,भोर कई द ए चान अंजोर कई द।।   परेम आपन…

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देखनी हम शमशान में

देखनी हम शमशान में, का आमिर रहे का गरीब धधके लागल अगिया, पाचतत्व में मिलल शरीर   ना माई ना बाप ना भाई, ना साथे रहे परोसी ओकरो के साथे न देखनी जेकरा के देहनी रोटी   जरत रही गइल देह सगरो जबले देह राख न भइले अब पछ्तइले का होई जब समय बीत के साथे अइले   दुनिया के पचरा में परि के हमहू समय गवाइले पर केहू से कईल वादा सांस तक निभाईले   आखिर एक दिन उहे रहिया, सबका खातिर राखल बा जईसन करम रही सभकर ओहिसन…

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गाँव के गदेला

मटिया के मोटर लकड़िया के ठेला खेलत नीक लागइ गाँव के गदेला। नीक लागइ नन्हका के माथे क डिठोना गइल बा लगाइ कि लगइ न जादू टोना भोरवै दूअरवा लगावैल मेला। गउवाँ के पुरब बा घन-बसवरिया लटकल टिकोरवा से अमवा के डरिया सहजइ उठाइके चलावइल ढेला। गउवाँ के दखिन बा डीह के चउरवा दुलहा झुकइल जहाँ बाँधि के मउरवा चांव-माव करइ जब कक्कन छूटेला। गउवाँ के पछिम बा शिव के मंदिरवा गौरी पुजालीं माथे भरि-भरि सेंदुरवा बटइ परसादी तब होखइ झमेला। गउवाँ के उत्तरबा निरमल बउलिया नंगै नहालै तीरे रखिके…

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एक दिन

लरिकइयाँ बोलावत रहे एक दिन गा के लोरी सुनावत रहे एक दिन   कतना माई के अँचरा सरगवा के सुख याद हमके दियावत रहे एक दिन   गम ना कवनों जमाना के छूवत रहे पांखि दे के उड़ावत रहे एक दिन   मन मे निर्मल धवल उ बदरिया रहे सगरों रस झम झमावत रहे एक दिन   सउसे धरती अकसवा ई आपन रहे फूल गमकत खिलावत रहे एक दिन   कइसे भारी भइले ई हवा ना पता इहे त गुद गुदावत रहे एक दिन   छोड़ कांटक तू हमरा के…

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भोजपुरी भाषा

सबका मन के नेह अउर तू सबका मन के आशा देश- विदेश में व्यापल जे ऊ भोजपुरी भाषा नेपाल , गुयाना ,मॉरिशस कि फीजी आ सूरिनाम टेक रहल बा रोजे माथा , जपत रहत तोर नाम भारत में तू बाड़ू लमहर भुँई भाग के बोली यू पी , बिहार , झारखंड में हिन्दी के हमजोली न रहल कबो तहरा त बाटे स्व – प्रचार के लालच साफ – साफ बोले समझे में ,तनिको नाहीं घचपच तहरा पाले बड़हन बड़ुए शब्दन के भांडार कबहूँ कोमल फूल सरिस तू , तू तेगा…

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बाबूजी हरवाही करेलन

मेहनत में नाहीं कोताही करेलन । हँ, हमार बाबूजी हरवाही करेलन।   होत भिनुसारे जालें बाबू साहेब के दुअरा बैलन के डाल देलन खाये खातिर पुअरा कान्हा पर जुआठ, हाथे बैलन के पगहा पूछ लेलें बाबू साहेब से जोते के जगहा निकले ना घाम अगवाही करेलन। हँ, हमार बाबूजी हरवाही करेलन।   जेठ के घाम में  फुलवो कुम्हिला जाला, चारो गोरे चले वाला बैलो लरूआ जाला बाबूजी हमार नाहीं तनियो सा थाकेलें पैना उठाई के खुबे उ बैलन के हाँकेलें जइसे कि थाना में सिपाही करेलन। हँ, हमार बाबूजी हरवाही…

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रंगदार हो गइल

रंगदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू.   ठेलठाल के इंटर कइलस बीए हो गइल फेल रमकलिया के रेप केस में भोगलस कुछ दिन जेल   असरदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू.   खादी के कुरूता पयजामा माथे पगड़ी लाल मुंह में पान गिलौरी दबले चले गजब के चाल   ठेकेदार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू.   पंचायत चुनाव में कइलस नव परपंच समरसता में आग लगवलस चुनल गइल सरपंच   सरकार हो गइल मोरा गाँव के लल्लू.   डॉ. हरेश्वर राय सतना, मध्य प्रदेश

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