‘भारत माता का भाल के बिंदी हमार ह ई राजभाषा हिंदी’

१४ सितंबर के हर साल ‘हिन्दी दिवस’ मनावल जाला। आज १४ सितंबर ह आ हमनियों परंपरा के पालन करत आज ‘हिन्दी दिवस’ मना रहल बानी। हमरा, रउरा आ इहाँ बिटोराइल हर मनई का ई मालूम बा कि केतना माथापच्ची के बाद आजाद भारत के राजकाज आ समाज के अपना मन-मिजाज माफिक चलाने खातिर बनल ‘संविधान सभा’ के सदस्य लोग बहुमत के आधार पर १४ सितंबर, सन् १९४९ ई. के साँझि के छव बजे देश के सबसे सबल-सुलझल सम्पर्क भासा खड़ी बोली(हिन्दी) के राजभासा के दर्जा दिहल। २६ जनवरी, सन् १९५०…

Read More

ई हौ हमार बनारस

इतिहास अउर अध्यात्म क अगर बात करल जाय त काशी के भारत क सबसे पुराना नगर कहल जाला | काशी ऊ नगरी हौ जहाँ भारतीय संस्कृति अउर संस्कार क फुलवारी अबही तक लहलहात हौ जबकि भारत में हर जगह ही पश्चिम के देशवन क असर खूब चऊचक देखात हौ | गंगा नदी के किनारे बसल काशी क विस्तार काशी के पवित्रता क कहानी कहला | न खाली हिंदुस्तान बल्कि विश्व के कोने कोने से लोग इहाँ घूमअ,पढ़अ,लिखअ आवलेन और इहाँ कुछ दिन रहअ के बाद एहि शहर के रंग में…

Read More

कासी कबहूँ न छोड़िये

” कइसन लगल हमार बनारस ए बचवा ? कवन-कवन घाट घुमला ह।कासी कोतवाल बाबा क दरसन कइला ह ? बाबा बिसनाथ जी क दर्शन त ठीक से मिल गयल ह न ? ढेर धक्कम-धुक्की त ना न रहल ह ?” गदगद् कंठ अउर भर-भर नयन पूछत रहलन बुढ़ऊ बाकिर बचवा खुनुसन कुछ बोलत ना रहलन बाकिर कुछ कहे के फेर में उनकर होठ तनी – तनी देर में फड़क जात रहल। ” काहें दिक्कत -परेशानी में  देखात हउवा बचवा।कुछ भयल ह का ?” अपने बनारस क बखान सुने खातिर कान…

Read More

भोजपुरी लोकगीत के अनन्य साधक: श्री जगन्नाथ मिश्र

“गांगा मिलती त खुब नहइती अम्मा मिलती त खुब बतिअइती”   आदरणीय नामवर सिंह जी के भोजपुरी भाषा के बारे व्यक्त कइल गइल ऊपरोक्त उदगार के अक्षरस: चरितार्थ करेवाला, श्री जगन्नाथ मिश्र जी (घर पिंजरोई ,थाना संदेश,जिला आरा पेशा-विज्ञान शिक्षक ,टउन स्कूल आरा) के, हमनी के भोजपुरी लोकगीतन के जनक, प्रतिष्ठापक,  प्रष्कोटा,  संकल्पक,  अन्वेषक, या पुनर-सर्जक, ए में से कवनों विभूषण से विभूषित करी, ई  सब इन कर हिमालय जइसन व्यक्तित्व के सामने बौना हो जाई। बौना होखें लाइक बतिये बा, कहे कि, जवना लोक गीतन के, हमार आज के…

Read More

धरती के बचावे खातिर लाल के आगे आवे के होई

देश दुनिया में पर्यावरण के तेजी से बिगरत हालात के देख के  अमेरिकी सीनेटर जेराल्ट नेल्सन ने 7 सितंबर 1969 के दिन घोषणा कइले कि 1970 के बसंत में पर्यावरण पर राष्ट्रब्यापी जन साधारण प्रदर्शन कईल जाई । उनकर  मुहिम रंग ला आईल आ एमें 20 लाख से अधिक लोग भाग लेलक। आ उनका समर्थन में जानल-मानल फिल्म आ टी.वी. के अभिनेता एड्डी अल्बर्ट ने पृथ्वी दिवस के निर्माण में एगो अहम भूमिका अदा कईले । ईहे  कारण बा कि उनके जन्म दिन पर  22 अप्रैल के दिन 1970 के…

Read More

जमाना बदल गइल

जमाना बदल गइल ! ई शब्द हमरा बहुत दिन से परेशान करत रहल | आखिर परेशान करे काहे ना ऐतना बड़का बात हो गईल आ हमरा कुछो पते ना चलल | ऐही बात जाने खातिर हम गईनी आपन दादी लगे जे हमरा सबसे बुजुर्ग दिखली | पुछली काहो दादी जमानावा बदल गईल बा का एतना सुनते ही उ आपन सहमति दे दिहली ” हा ये बबुआ जमानवा त ढेर बदल गईल बा” | हमरा मन मानल ना हम हम दादा के पास गइली ऊहो ईहे सुने मिलल | जहाँ सुनी…

Read More

विश्वाश मे धोखा

का कही कुछ समझ न आवे,  कुल ग्यान ध्यान सब खो जाला । जब विश्वाश मे धोखा हो जाला-२ लोग सतर्क रहेला दुश्मन से, पर घात खास से खा जाला । विश्वाश मे धोखा  हो जाला-२ जे हरदम हरपल साथ रहे, हसी हसी करत हर बात रहे । पर हम ना जननी ऐ भईया , ऊ प्रेम नाही विश्वाशघात रहे।। लोग जोहेला मौका खाली ले संघे छल कपट के भाला। विश्वाश मे धोखा हो जाला -२ ई बात ली खुंटे गठियाई, केहु के न दिल के बात बताई। आपन इज्जत…

Read More

स्मृति शेष (विशेष)

परम पूज्य महामना मदन मोहन मालवीय जी एक युग महापुरुष रहनै। 25 दिसंबर 1861 ई0 में पंडित ब्रजनाथ आउर श्रीमती मुन्ना देवी के बेटा के रूप में जन्म लेहनै । ब्रजनाथ व्यास जी के पवित्र आउर  सात्विक गुड़न क भरपूर प्रभाव मदन मोहन मालवीय जी में बचपने  से दिखाए लगल । घर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद उनके पंडित हरदेव जी के धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला मे भेजल गयल। पंडित जी अपने शिष्यन के अपने बचवा जैसे मानै। दूध पियावै अउर कसरत करावै । कुश्ती भी लड़वावै । उनकर इहे ध्येय…

Read More

ढाई आखर प्रेम का

प्रेम कहल केकरा के जाला , ई  एगो बिचारे जोग बात ह ।  प्रेम एगो अलगे चीजु ह आ आजकल  जेकरा के प्रेम कहल जा रहल  ह , उ प्रेम ना ह , उ आसक्ति ह, मोह ह ।  आज जेकरा के प्रेम कहल जा रहल बा  उ दोसरा के संगे अपना के जोड़ के पहिचान बनावे के एगो तरीका भर ह । एकरा के प्रेम ना कहाला , एकरा के आसक्ति भा मोह कहल जाला । बाकि आजु के नवाहा लोग एकरे के प्रेम बुझता ,जबकि एकर प्रेम से…

Read More

का अब सामाजिक अनुशासन के जरूरत नइखे ?

पलिवार एगो अइसन संस्था ह , जवन अनुशासन के संगे नेह – छोह आउर रिस्तन के अपने मे बन्हले आ जोगवले आगु बढ़ेला । जहवाँ आदर – सनमान  , छोट – बड़ के गियान आ समझ के सोर ढेर गहिरा से जकड़ेले , समाज के ताना – बाना के मजगुती देले । समाज के भीतरी के बुनावट के संभार के इंसानियत के रसते एक दूसरा के सहारा बने के भाव उपजावेले । एकरे चलते पलिवार के इजत समाज मे दमगर रहेला ।  आपुसी रिसता के मोल आ महातिम , एक…

Read More