जोन्ही के बियाह

रोज के तरह आज भी बटुन चाचा अपन सब्जी के ठेला पर के समान बेच के घर लौट के चपाकल पर मुंह हाथ धोवत रहे. उनकर मेहरारू किचन में से जाके उनका खातिर भोजन तैयार कर के लियाइली. दिनभर के हारल थकल बुटन चाचा टबुल फैन के पास बैठ के ठंडा ठंडा हवा की लुफ्त उठावे लगले. उनके हृदय में ई वक्त जवन शकुन रहे ऊ ठीक उलटा उनका घर में धीरे धीरे अशांति अपान पैर पसारे लागल रहे जवना के ऊ दूनो मियाँ बीवी के अंदाजा भी ना रहे.

 

बुटन चाचा और उनकर मेहरारू खाना खत्म कर के जैसे ही हाथ धोवे खातिर उठेवाला ही रहे लो तब तक उनकर दस साल के छोटा बेटा बिरूआ घबराइल  आकर बोललस- “माई बाबूजी जल्दी चली, दीदीया के चक्कर आ गया बा और ऊ पलंग से नीचे गिर गइल बिया

 

ये सुनते ही बुटन चाचा और उनकर मेहरारू हाथ धोवल भूल के अपन बेटी जोन्ही के रूम के तरफ दौड़ पड़ले.

 

वहाँ पहुँचकर ऊ अपन बेटी को जमीन से उठा कर पलंग पर लेटा के डाक्टर साहब के देहल दवा ओकरा मुँह में डाले लगले. और मुँह पर पानी के छीटा मारे लागल लो.

 

दवा के असर से अब धीरे धीरे रेश्मा शांत हो कर बिस्तर पर निढाल होखे लागल.

बिस्तर के एक कोने में बैठ कर बुटन चाचा की मेहरारू फफक कर रो पड़ली.

“पता ना कवना के नज़र लाग गइल.” बुटन चाचा कहले.

 

छः महीने पहिले के ऊ भयावह दृश्य सब लोग के नजर के सामने तैरे लागल.

नया होखे वाला रिश्तेदारन के बीच जोन्ही आंख झुकाके सज धजकर के बइठल रहे. लइकी बहुत करिया बिया, बेमरिया लागत बिया त नाक के नक्शा भी ठीक नइखे. ई सब टीका टिप्पणी से लागे कि जोन्ही के शरीर पर केहू चाकू घोप रहल बा.

 

“जोन्ही के जइसन नाम पड़ल रहें ओकरा ठीक उल्टा जोन्ही के शरीर के बनावट रहें ” लोग मुहा मुही ई बात कहत फिरे की जोन्ही नाम रखला से लोग जोन्ही नियन थोड़े चमके लागी . ई सच रहे की बुटन चाचा के बेटी जोन्ही देखे में सुंदर ना रली.  यही कारण ओकर अभी तक शादी ना हो पावल. उम्र तीस पार कर गइल रहे. घर के लोग के साथ हीत नाता भी शादी ना होखे के कारण परेशान रहे लोग. अभी तक ना जाने कतना रिश्ता आइल आ टूट गइल रहे.

 

मुहल्ला के चाची भाभी सब तेरछवाही बोली बोले में कवनो कसर ना छोड़े लो:- “ए जोन्ही खूब रगड़ रगड़ के नहा फिर देखा कवनो फिल्म के हिरोइन नियन गोर हो जाइबू.” ई सब गहरा तंज सून के जोन्ही के के आंख से आंसू छलक पड़े.

 

जोन्ही शुरू से ही साधारण लइकी रहे कवनो तरह दसवीं पास कर के घर के ही चुल्हा चौका में आपन जीवन समर्पित कर देले रहे. माई बाबूजी के कवनो खास आमदनी ना रहे कि ऊ आगे पढ़े लिखे के बारे में भी सोचे. अइसे गाँव में कवनो लइकी दसवा ले पढ़ ले त ओके बहुत पढ़ल लिखल मानल जाला.

 

जोन्ही जहाँ भी जाए, ओकर विवाह ना होखे के चर्चा बनल रहे. एही से ऊ अधिकतर गाँव टोला के ब्याह शादी या कवनो भी जग प्रोजन में जाए से कतराये.

 

जोन्ही के साथ के सब लइकियन के ब्याह हो गइल रहे. ब्याह के कुछ महीना बाद जब ऊ आपन मायका वापस आवऽसन तब जोन्ही या फिर जोन्ही के माई ल बइठ के आपन गृहस्थी के बखान सुनावे के कवनो कसर ना छोड़ऽसन. जोन्ही के लागे की माने सब जान बुझ के ओकर दिल के लोग दुखावे ला.

 

जोन्ही एक दिन अकेले में आपन बिछावन पर पड़ल पड़ल पता ना का-का सोचत विचारत रहे. हमार मैल कुचैल देह, असुंदर शरीर के बनावट, सावला रंग ई दुनिया के बाजार में ऊ बस एगो बिना किमत के फेंकल चीज बिया जेकर इच्छा, सांस ,संवेदना,  भावना के कवनो मोल नइखे ई धरती पर. ना जाने कतना निगेटिव बात जोन्ही के मन में दौड़त रहे और अब बेहोश होखे के पलंग पर से नीचा गिर गइल ओकरा पता ही ना चलल. जब डाक्टर के इंजेक्शन आ दवा मिलल तब जाके होश आइल रहे.

 

आज ई जोन्ही दुसरा बार बेहोशी के हालत में पलंग पर से गिरल बिया. माई बाबूजी के चिंता के मारे शरीर में एक चुरूआ खून ना बाचल रहे.

जोन्ही के बाबूजी दवाई के पर्ची लेके फिर डाक्टर साहेब ल गइले. डाक्टर साहब से आज के घटना के बारे में बताइले.

डाक्टर साहब कहले:- देखी बुटन भाई ई कवनो बेमारी ना हा एकर कवनो ठोस दवाई इलाज नइखे. बस एके गो इलाज बा कि बेटी के दिलो दिमाग से ओकर जवन अपना प्रति हीन भावना पैदा भइल बा ओकर दूर करे के प्रयास करी. बेटी के उम्र तीस से ज्यादा हो गइल साथ के सारी लइकियन के ब्याह शादी हो गइल. ना जाने बीस पच्चीस के रिश्ता वाला ठुकरा देलन सन. ऊपर से समाज में कईं तरह के बात लोग बोलत रहेला कि करिया बिया त कुल्छनी बिया.ई एगो ओकरा खातिर सदमा बा. दवाई इहे चलाई धीरे धीरे असर होई आ भगवान के माया होई त जरूरे सुधार होई.

समय के रफ्तार धीरे धीरे निकले लागल मेघा लोग के कटाक्ष बात के चलते हीत नाता से दूरी बनाके जीये पर मजबूर हो गइल. डाक्टर साहब के दवाई के असर कही त या फिर भगवान के कृपा कही त जोन्ही के तबियत में सुधार होखे लागल.

 

आज सुबह सुबह बुटन चाचा जोन्ही के माई से कहले कि जैतपुर गाँव से एगो रिश्ता आवत बा बेटी के तनी हल्दी के अपटन लगा दऽ, और बबुआ के साथे बजारे पर ब्युटीपार्लर में भेज दा. हम जात बानी नास्ता और मुर्गा के इंतजाम करें.

दुअरा हित मेहमान आ गइले. आज फिर जोन्ही आंख झुकाके सज धजकर के बइठल रहे लाल साड़ी में सबका बीच में बइठल रहे.

लइका के माई:- “देखी बहीन जी राउर बेटी हमरा पसंद बिया, हम राउर बेटी के आपन पतोह बनावे खातिर तैयार बानी बाकी एगो शर्त बा.”

पहली बार कोई जोन्ही के पसंद कइले रहे. ऊ पल जोन्ही खातिर कतना खुशी के पल होई राउवा अंदाजा लगा सकत बानी. बाकी शर्त वाला बात सुन के माई बाबू जी के साथ जोन्ही के चेहरा पर भी चिंता के लकीर खिचा गइल रहे. शर्त सुनते बुटन चाचा और उनकर पत्नि के ठकुआ मार देलास. जैसे ई लोग सोचे लागल कि कहीं दहेज के मोटा रकम त नइखे नू मांगत लो.

बुटन चाचा:- दहेज…

लइका के माई:- ना जी दहेज ना, बात ह की हमार बेटा दोवाह बा. हमार बेटा के पहिला जवन ब्याह भइल रहे. ऊ पतोह के इंतकाल हो गइल आज से छः महीना पहिले और ऊ बेचारी के देह से एगो 06 महिना के बेटा बा, का राउर बेटी ऊ बच्चा के अपना लिहन. ई बात सुन के बुटन चाचा और उनकर पत्नी के देह में चिरले खून ना रहे. माई बाबू जी के जबाब देवे के पहिले जोन्ही बोल पड़ल.

“जी माँ जी, हम राउवा के सिकायत के मौका ना देम. ऊ बच्चा के हम माई बने के पूरा कोशिश करेम. बाकी का….?

लइका के माई:- बाकी का? बोला बेटी. जवन बात बा ऊ ऐही जा क्लियर हो जाओ त ठीक रही.

जोन्ही:- “माँ जी का राउर बेटा हमार ई रूपरंग देख के घृणा त ना नू करिहन.” ई बात कहेमे जोन्ही के आंख भर आइल. ई टाइम जोन्ही के खुद के ऊपर घृणा होत रहे.

लइका के माई:- ए बेटी ई रंगरूप के, का बात करत बारु तू. का तहार पैर टूटल बा. का तहार हाथ टूटल बा. अरे रंग रूप करिया गोर ईहे नू होला. देह करिया होखे के चाहि लेकिन मन करिया ना होखे के चाहि. हामू करिया रहनी आज बुढ़ारी में गाल झूल गइल त नइखे बुझात.

बुटन चाचा हाथ जोड़ के लइका के माई के आगे:- बाकी बहिन जी एगो विनती बा कि हमार गाँव समाज भाई परिवार खातिर जब तक शादी नइखे हो जात ई बच्चा वाला बात राउवा राज ही रखती त ठीक होइत काहे कि लोग लोग हमनी के नीचा देखावे के कसर ना छोड़ी.

लइका के माई:- भाई जी राउवा टेंशन मत ली. राउर ई लंगटा गाँव समाज के नजर में ई राज राज ही रही.

तब तक जोन्ही बोल पड़ल:- ना माँ जी ऊ बच्चा हमार शादी के दिन ही हमरा गोद में रही त ठीक रही. काहे कि हम आपन गाँव समाज के देखावल चाहत बानी हमरा देह करिया आत्मा करिया नइखे.

आज ऊ दिन भी आ गइल रहे कि जोन्ही के अंगना में मारो के बांस गरा गइल. आज बुटन चाचा के सर भार हलुका होखे वाला रहे त बुटन चाची दमाद परिछे वाला रली. त आज जोन्ही सोरहो सिंगार के साथ सुहागिन बने वाला रली. गाँव जवार के जे ओल बोल बोले वाला लोग रहे ओकरा मुंह पर आज करिखा पोता गइल रहे. आज कन्यादान के समय ऊ 06 महिना के बच्चा जोन्ही के गोद में रहे.

  •  जियाउल हक

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