सुगना

जब से घरवा से गइलै नाही लवट के तू अइलै

नाता सबही से तोड़लै हमसे दूर तू भइलै

रहिया ताकेला अंगनवा , तोहार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

अबके कहके तू गइलै, नाही जल्दी तू अइलै

माई – बाप के असरा, ओनकर सपना तू तोड़लै

हमनीक जीयै क तू हउवा, आधार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

तोहै जोहै पूरा गाँव , ठंडी पीपल कै छांव

जोहै खेत – खलिहान , बखरी नदी कै सिवान

हउवा गाँव कै तू हमरै , पहिचान सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

आइल मोबाइल जमाना , चिट्ठी पाती भइल पुराना

नेटवर्क गाँव मे न लागे , कइसे संदेश पँहुचे

कइसे पहुंचाई तोहरे पास दिल के अरमान सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

धनिया ब्याह भईल , शीलवा गवाना गईल

मीनवा देखै के अइलै, मनवा ब्याकुल भइलै

बिटिया कै कब हम करबै बियाह सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

कितना गिनाई सितम घर कै सुकुन बा खतम

घर मे राशन न पाई , कैसे चूल्हा हम जलाई

बनिया अब नाही देत बा उधार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

अबकी जो तू न अइलै , हमके जीयत न पइबै

आस बधल बा जरूर , सांस चलत बा जरूर

रहिया देखत निकल न जाय , परान सुगना

आईजा आईजा अंगनवा , हमार सुगना

आईजा आईजा अंगनवा……………………

 

  • डॉ अखिलेश चंद्र

असोसिएट प्रोफेसर

शिक्षक प्रशिक्षण विभाग

श्री गांधी पी जी कालेज

मालटारी आजमगढ़

 

 

 

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