रउआ बिटियन प खूबी इतराईं भाईजी

रउआ बिटियन के खूबहिं पढ़ाईं भाईजी

रउआ बिटियन के खूबहिं लिखाईं भाईजी।

 

भेदभाव के भूत भगाईं प्रेम के जोत जलाईं

नेह-छोह के खाद डालके सुन्दर फूल खिलाईं,

रउआ बिटियन के बेनिया डोलाईं भाईजी

रउआ बिटियन के झुलुआ झुलाईं भाईजी ।

 

तनिका सा ढीली छोड़ब त धइ ली इ आकास 

चाँद सुरुज जइसन फैलाई दुनियाँ में परकास,

रउआ बिटियन के खूबहिं हँसाईं भाईजी

रउआ बिटियन के खूबहिं खेलाईं भाईजी ।

 

घर के बन दरवाजा खोलीं खुला समर में लड़े दीं

ऊँचा से ऊँचा परवत प छोड़ीं ओहके चढ़े दीं,

रउआ बिटियन के खूबहिं लड़ाईं भाईजी

रउआ बिटियन के खूबहिं बढ़ाईं भाईजी ।

 

एक हाथ में पेन धराईं दूजे में तलवार

नाया नाया गीत रचे दीं भरे दीं हुंकार,

रउआ बिटियन के निरभय बनाईं भाईजी

रउआ बिटियन प खूबी इतराईं भाईजी ।

डॉ. हरेश्वर राय, सतना, मध्यप्रदेश

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