पुवरा के ओढ़ना

भीषण ठंड के मौसम बा। अईसन ठंड लागत बा की खून जम के बर्फ हो जाई। पाँच साल के मनोज हाथ गोर सेकुड़वले एगो टुटल खाट पर ठिठुरल रहे। जब अब मनोज के ठंड बर्दाश्त ना भईल त धीरे-धीरे कुल्ह-कुल्ह के रोवे के चालु कईलस। मनोज के माई धान पिटत रली त उनका मनोज के रोवे के आवाज सुनाई देहलस त ऊ मनोज से पूछली “काहे रोये लगलीस”

मनोज आपन तोतलाई आवाज में बोललस “बहुते ठंडा लागत बा।” माई के हृदय कचोट गईल तब ई दृश्य देख के मनोज के माई से भी सहन ना भईल त अब ऊ धान पिटल छोड़ के आग जला के मनोज के गोद में सुतवले आग के घुरा ल बईठ गईली। तब जाके थोड़ा मनोज के शरीर मे गरमी के एहसास भईल।

सुबेरे-सुबेरे मनोज के माई दुगो फाटल चादर के बीच मे धान के पुआरा डाल के सिलाई कर के मनोज के ओढ़ना बना के रख देली ताकी मनोज के अब ठंडा मत लागे।

 

जियाउल हक

जैतपुर सारण बिहार।

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