नन्हकी के माई

आज भोरही से मड़इया में  खुबे आवाजाही  लागल बा। नन्हकी के माई आज अकवार से बाहर निकल जात बिया। बड़की चाची  जब खिसियास त उ घरी तनी घुघटा के  सरका के कहस- ए अम्मा!  बहरिया कोई ना रहल ह। आ नन्हकी के कबे से कहतानी सुनते नईखे।त हाली हाली निपटारा करे खातिर …………. एतने में – ‘अच्छा ठीक बा। जा घरे ‘बड़की चाची के  ऐलान सुनते भीतर चल गईली।

ए नन्हकी ! सुन ! साबुन से  बढिया से मुँह धोके पउडरवा तनी लगा लीहे। अबकी तोर मुँहवा साफा लागता । इ जे एक महीनवा हरदी चनन लगइलिस नु। एही से नीक लागता। लइकवा तनी साफा बा।

लइका खुबे पढल- लिखल बा। सुने में आइल ह जे उ कहले बा कि लइकिया पढ़े में तेज होई आ हमरा मन के उपजल प्रश्न के उत्तर दे दीही  त ओही घरी ‘हॅ’ कह देब। ए पीर बाबा! ए गंगा  माई! ए देवरहवा बाबा! रउरा के गोर लागतानी। नन्हकी के  अबकी बियहवा फाइलल करा दीहीं। रउरा हमरा के बेटी दिहनी एकर दुःख हमरा नईखे लेकिन रंगवा रऊरा एकदम दब देहनी ए बात के दुःख बा। हम सेर भर लइचीदाना चढ़ाइब। शीतला माई के  मंदिल जाइब । केकर केकर ताना केतना सुनब ।ई हमार बनावल दोष त ना ह बाकिर राउरे दिहल बा त रऊरे किरिपा करींऽ।बोलते बोलते पसेरी भर लोर गिर गईल ओकरा माई के ।

ऐ माई! ऐ नन्हकी के माई! निकल बहरी। देख । आ गईल लोग।  नन्हकी के  बाबूजी दुअरे से हाक मरनी त नन्हकी के माई के  देह मे एगो अलगे किसिम के फुरती आ गईल।

आरे ए माई! कहाँ बानी। ओसरवा में जाईं। आ गईल लोग। ‘ठीक बा’- कहते माई ओसारा में  बिछल खटिया पर जाके बईठ गईली। जोर से कहे लगली- एजी! ले आईं । बहरिये सब बात हो जाई का। एहजी नस्तवा ठंडा जाता। माईयो अपना माथा के अॅचरा सरकरवली तनी आ कहते कहते  बहरिये चल गईली। चलीं, चलीं आईं । अब  नस्ता के  संगही बातो होई।

ओकरा बाद  सब कोई  ओसारा में  आ गईल।

नन्हकी के  माई जब नन्हकी के  लेके अइली त लइका ओकरा पर टकटकी लगा के देखे लगलस। सब कोई ई देख के एक दोसर के मुँह देखे लागल।

नन्हकी के  माई सीन बदले खातिर कहली- आ सब अबही ले धइले बा ।लीहीं ना बउवा।

हूँ ऽऽ। अब आइल बानी त खाइये के  जाइब। बाकिर तनी नन्हकी  से अकेलहूॅ में कुछ पूछे के बा- लइका कहलन।

एतना सुनते बाबा जोर से  कहे लगलन- ऐरू गैरू घर के हमनी बुझतार का। परदेशी के  जोर दिहला से हम लइकियो देखइनी ह ।ना त हमनी कीहां ई सब ना चलेला। हम अपना लइकी के  बाहर भेज के पढवनी त लइका भी त ओइसने चाहीं। एही से तहरा के  लइकीयो देखा देनी ।अब अकेले का। जे पूछे के बा एही जे पूछ ल।

ठीक बा। हम एही जे पूछतानी -लइका कहलन।लेकिन  रउरा लोग  बीच में बात में मत घुसब।

एकरा बाद  पढाई लिखाई के बात भईल ।नोकरी करे के विचार पर बात भइल। अंत में लइका कहलन- अच्छा!  ई बताव। एतना मुँहवा में पावडर काहे लगइले बारू। ई बात सुनते नन्हकी के  माई बीचे में कहे के शुरू कईली- ना हमी तनी ऽऽऽऽ।

रउरा तनी चुप रहीं। हम नन्हकी से पुछतानी।

नन्हकी बिना कुछ  कहले लोर ढरकावे लागल। ओकर लोर से नन्हकी के  माई के लोर दुगना गिरे लागल। लइका कहलन- रोव मत। जबाब द।

नन्हकी के  मुँह से एतने बड़ी मुश्किल से निकलल- माई कहलस।

लइका कहलन- जा मुँह धो के आव।  एतना सुनते बाबा आ बाबूजी त गरम होखे लगलन। दादी बुझ गइली। उ खुदे बाहर चल गइली ।आ बोलवली- सुनतानी जी। तनी हेने आईं । ऐ बबुआ! तुहूं आव।

ऐ नन्हकी के  माई! तनी दु गिलास पानी ले आव।

सब कोई धीरे धीरे उहां से हट गइल। नन्हकी मुँह धोके अइली त लइका कहलन- देख! हमरा बनावटी लोग आ लीपल पोतल फैसनवाला मुँहवो पसन्द नइखे। बाकिर तहार सोच हमरा बहुते पसन्द आईल । अब  हम त अइसहीं बानी। जे कहे के बा सब साफ साफ  कहेनी। तहरा हमार बात मिजाज ठीक  लागल त बोलऽ तहरा बाबा के हम हॅ कह के जाइब। नन्हकी के मुँह पर मुस्कान छा गईल। उ खाली आपन  अॅखिये  से लइका के  सबकुछ  कह देली। ओकरा बाद  लइका कहलन- तु जा अब। फेर  भेंट होई जल्दीये।

नन्हकी के जाते सब जन भीतर आ गईलन। का ऐ बबुआ! का भईल। पूछ लेलऽ नु। दादी कहते कहते खटिया पर फेन बिराजमान हो गइली।

लइका कहलन- हमरा त लइकी पसन्द बारी। रउरा लोग तईयारी करीं।

का? का कहतारऽ ! तहरा घर में  बड़ कोई नईखे का- बाबा बीचहीं में  टोक देहलन।

लइका कहलन- बारन काहे ना। सब कोई  बा ।दादी दादा माई बाबूजी  मामा  मामी चाचा चाची बुआ मौसी सभे बा। लेकिन  ऊ लोग भी रऊरे लोग जइसन बारन। रंगवा के  लोभ उनहूं के मन में बा। गोर खोजिहें त फेर का होई। हमनी के त बदल रहल बानी।लेकिन रऊरा लोग के कइसे बदलल जाव। सब के माई के गोरे लइकी आ गोरे पतोह चाहीं त करीया पैदा काहे करके बड़का करेनीऽ लोग। जनमते तनी नीमक चटा देतीं त झंझटे ना होइत। गोरका के जियावल जाइत।करीयका के  ओही घरी मार देवे के  चाहीं।

आज त बाबा के  कड़कदार बोली  गाएबे हो गईल रहे। चुपचाप बैठले रह गईलन। अब  कोई  कुछ ना बोलत रहे। चुपचाप।  सन्नाटा  छा गईल रहे।

लइकवे चुप्पी  तुडत कहलस – ठीक बा।अब हम चलतानी। जे होई खबर कर देब त हमरो के त अपना घरे बतावे के  होई। परिवार के त रसम खातिर  बोलावल जरूरी होई। सब लोग के बोलावे के  पड़ी ।एह से तनी जल्दीये आपन जबाब देब।

बाबूजी बात के संभारत कहलन- ठीक बा। हमनी के  पंडी जी के बोला के रउरा के फेर  फोन  करब।

लइका के जाते बाबा के बोलिये बदल गइल- ई लइकवे हमनी के अखिया के  परदा हटइले बा। सांचही कहत रहे जब हमनीये के पाउडर लगा के करीयापन मेसे के चाहतानी त जे ले जाई ओकरा मिलावट लऊकी ना का। एकदम लइका सोना बा। नन्हकी खातिर  अब इहे लइका के हम मान लेनी। केतनो दहेज मांगी त हम कहीयों से जोगार करके देब लेकिन  एही लइका हमरा पसंद  बा।

बाबा ओही घरी बाबूजी के कहलन- फटफटिया निकाल। अभी  पड़ाव पर होईहें। चलऽ  हॅ कह दिहल जाव आ परदेशियो के  घरे मिठाई  दे देहल जाव।

बाबा आ बाबूजी फटफटिया लेके बस अड्डा  चल गईनी। नन्हकी के  माई नन्हकी के  झट से चुम्मा ले लेहली आ ओकर हाथ पकड़ के कुलदेवता के आगे  माथा टेक दिहली। गोर लागके अपना मन के सब बात कहे के शुरू  कइली- ए कुलदेवता! हमरा के माफ करीं। राउर दिहल बेटी के  हम कम बुझनी। तबहुं रउरा हमरा ऊपर किरिपा कइनी। लइका एतना सुघड़ भेजनी। हमरा के माफ क दीं। लोर त रूके के नामे ना लेत रहे। माई के रोवत देख के नन्हकीयो सुड-सुड करे लागल। तब नन्हकी के  माई के धेयान टूटल- ए बाछी! आ तु काहे रोवतारू। हमहीं त तहरा संगे नाइंसाफी कइनी। हमरा के माफ कर दऽ। आ अब रोव मत। देखऽ मुँह कइसन हो गइल। बाबा हॅ कहे गइल बारन ।जल्दीये दिनो धरा जाई। फेर हमार चिरई उड़ जईहेऽऽ। कहते कहते फेर लोर बहे के शुरू हो गइल ।तबले दादीयो धीरे धीरे पहुंच गईलीआ कहे लगली- आजे रो लेबु लोग काऽ। रहे दऽ अब। बिदइयो खातिर तनी बचा के रखऽ लोग। आ चलऽ तनी बढ़िया चाय बनावऽ आ तनी हलुवो बना के मोहल्ला में  बाॅट दऽ। बाकिर अभी केहु के  कुछ बतइह मत ।छेका हो जाव त बता दिहल जाई।

तीनो लोग  माथ टेक के देवता घर से निकल के भंसारघर में  पहुँच गइली। नन्हकी के माई शुद्ध घीव मे सूजी भूंजे लगली। आज हाथ के चुड़ी कुछ तेजेऽ खनखनात रहे आ गावत रहली- गाई के गोबरे महादेवऽऽ………….।दादीयो खटिया पर बइठ के  नाक से सुर में  सुर मिलावे लगली। नन्हकी मनही मुसकात रहे। नन्हकी के माई आज आपन बेटी पर मनही मन धधात रहली। ई उनकर जियरे देख सकत रहे। हलुवा के  खुशबू  से पूरा घर महक गइल। अब दोसर गीत शुरू हो गईल-  बड़भाग हमरो करब कन्यादान हे माई।बेटी भगमनिया मिलले सीरी राम हे माई…………………।

 

  • डा0 रजनी रंजन

घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम

झारखंड ।

 

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