कौआ के रिवाज

गाँव मे गजब गजब के लोग रिवाज निभावेला। कभी कभी ई रिवाज जानलेवा बन जाता तब लोग पश्चात के रह जाला। आज भी गाँव मे लोग आजादी के 70 साल बाद भी ई अंधविश्वास के संका मे डुबल बा कि कवनो अनर्थ ना हो जाए। हम ई कवनो  भगवान और खुदा के बात नईखी करत। हम ई आच्छा तरीका से जाना तानी के भगवान और खुदा के इबादत कईला से मन और दिल के शान्ति मिलेला पर कुछ अईसन रीति-रिवाज के लोग पालन करत आवाता की जवना से भगवान और खुदा से कवनो रिस्ते ना नजर आवत होखे। हम ई एगो अईसन  घटना के बात कहा तानी जवन ई घटना त लोग के हृदय गति रोक सकेला। रामलाल के घरे फोन आईल की रामलाल के जीजा जी के एक्सीडेंट मे मौत हो गईल। ई जेकरा मोबाइल पर फोन आईल रहे ऊ रामलाल के पत्नि सुमन देवी रही ई बात सुन के सुमन देवी एके बार जोर से छाती पिट के चिल्लाईली “आम्मा जी हो बनकट वाला पाहुन के एक्सिडेंट हो गईल ऊ अब ई दुनिया मे नईखी” ई कहत रोये लगली। आम्मा जी यानी रामलाल के माई जे छत पर कपड़ा पसारे चढ़ल रली जब ऊ आपन दामाद के दुर्घटना के बारे मे सुनाली त उनकर सर चक्करा गईल आउर ऊ छत पर से सिधा आँगन मे गिराली। गिरते उनकर कहानी खत्म हो गईल। हल्ला मचल पुरा टोला मे की रामलाल के जीजा के एक्सिडेंट हो गईल आउर उनकर माई छत पर से गिर के मर गईली। पुरा टोला के लोग आनन-फानन मे जुट गईल रामलाल भी खेत मे से दौड़ाल अईले। रामलाल बेचारा माई के खुन से लतफत देख के रोवे लगले। सुमन देवी यानी रामलाल के पत्नी भी विलाप करत रली। जब रामलाल के पता चलल की उनकर जीजा जी के भी एक्सिडेंट हो गईल बा तब आपन मेहरारु से मोबाइल लेके आपन बहिन के घरे फोन लगईले तब पता चलल की उनकर पाहुन त खाना खा तारे ऊ पाहुन के सिर पर कौआ ठोकर मराले राला ऊहे मेधा मिटावे के खातिर ससुराल मे फोन भईल हवे, काहे की ससुराल मे दमाद के मान ज्यादा रहेला। अगर सास-ससुर थोड़ी-सा रो दि त मेधा मिट जाई। हाये रे कौआ रिवाज।

  •           जियाउल हक

जैतपुर सारण बिहार

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