कन्या जनम सोहर

मिथिला नगरिया भइलें पावन ,

जन मन लुभावन नु हो

अरे हो जनम लिहनी सीता

सुलक्षिनी मंगल गावन नु हो ॥

 

दउरि दउरि रानी बिहंसेली ,

निहारी आंचर हुलसेली हो

अरे हो एही खाति अइहें राम

होई जनकपुर पावन नु हो ॥

 

छउंकि छउंकि नाचेलीं पतुरिया

से जनक दुवरिया नु हो

अरे हो जनक जी लुटावत सोनवा

सजल नगरिया नु हो ॥

 

बगिया मे हुनुकेले बेलिया

कुंहुके बनवा कोइलिया नु हो

अरे हो जननी के पउवाँ से पावन

भइलीं बखरिया नु हो ॥

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

 

 

 

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