मटिया क गांव

पीपर पकरिया के गछनार छाँव हो, ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो। मुर्ग़ा के बोलिया पर जहवाँ बिहान बाय, मनवा रिझावै बदे बिरहा के तान बाय। दिन रात चलत थकत नाही पाँव हो, ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।। देहियाँ क जहवाँ सिंगार बाटै माटी, जोगवल जात बा पुरान परिपाटी। कगवा क बोलिया सगुन काँव काँव हो, ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।। कबहुँ सुखात ना पसीनवा क सोती, खेतवा कियरिया से काढ़ि लेत मोती। कबौं बिधि दहिने कबहुँ जात बाँव हो, ऊँच नीच…

Read More