एक दिन

लरिकइयाँ बोलावत रहे एक दिन गा के लोरी सुनावत रहे एक दिन   कतना माई के अँचरा सरगवा के सुख याद हमके दियावत रहे एक दिन   गम ना कवनों जमाना के छूवत रहे पांखि दे के उड़ावत रहे एक दिन   मन मे निर्मल धवल उ बदरिया रहे सगरों रस झम झमावत रहे एक दिन   सउसे धरती अकसवा ई आपन रहे फूल गमकत खिलावत रहे एक दिन   कइसे भारी भइले ई हवा ना पता इहे त गुद गुदावत रहे एक दिन   छोड़ कांटक तू हमरा के…

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प्रगतिशीलता के नाँव पर

भाषा सब अइसन भोजपुरी साहित्य में बेसी कविते लिखल जा रहल बा. दोसर-दोसर विधा में लिखे वाला लोग में शायदे केहू अइसन होई, जे कविता ना लिखत होई. एही से कविता के जरिये भोजपुरी में साहित्य लेखन के दशा-दिशा, प्रवृति-प्रकृति के जानल-समझल जा सकत बा. साहित्य आ साहित्य के शक्ति के बारे में एगो श्लोक भरतमुनि कहले बाड़े – नरत्वं दुर्लभं लोके विद्वत्वं तत्र दुर्लभम्. कवित्वं दुर्लभं तत्र शक्तित्वं तत्र दुर्लभाः . कविता आ काव्य शक्ति के जे हाल होखे भोजपुरी में कवि आ लेखक के भरमार बा. एही भरमार…

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भोजपुरी भाषा

सबका मन के नेह अउर तू सबका मन के आशा देश- विदेश में व्यापल जे ऊ भोजपुरी भाषा नेपाल , गुयाना ,मॉरिशस कि फीजी आ सूरिनाम टेक रहल बा रोजे माथा , जपत रहत तोर नाम भारत में तू बाड़ू लमहर भुँई भाग के बोली यू पी , बिहार , झारखंड में हिन्दी के हमजोली न रहल कबो तहरा त बाटे स्व – प्रचार के लालच साफ – साफ बोले समझे में ,तनिको नाहीं घचपच तहरा पाले बड़हन बड़ुए शब्दन के भांडार कबहूँ कोमल फूल सरिस तू , तू तेगा…

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गीत

कोइला में हीरा हेराइल कुफुत में जिनिगिया ओराइल बलमु तोहें कुछ ना बुझाइल !! असरा के ढेंढ़ी तनिक ना गोटाइल बनउर से सपनन क फूल बिधुनाइल करजा क सूद गढ़ुआइल बलमु तोहें कुछ ना बुझाइल !! अबहीं ले अँगरेजी भूत असवार बा कहे बदे हमनी के इहाँ सरकार बा नेति बा अनेत में हेराइल बलमु तोहें कुछ ना बुझाइल !! कउवन के मान जान, हंस लखेदाइल नीर-छीर पोखर क सोत बा सुखाइल बेमसरफ घास बढ़ियाइल बलमु तोहें कुछ ना बुझाइल !! अशोक द्विवेदी संपादक, पाती

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बरखा गीत

बदरी बदरी बा नयनवां जाने कब बरसे ओरियाव हो अंगनवां जाने कब बरिसे। ढांप दिह लय धुन ढांप दिह गीतिया ढंपिह पथार लेखा पसरी पिरितिया ढंपिह अच्छर गियनवां ओठे कहनी कथनवां हाथे दूनो दरपनवां जाने कब बरि से। बदरी0   जिन मेहराये सांसतोहरो उछहिया ओरा बोराओढ लीह जिनगी के रहिया झारदीह कुण्ठा कथनवां कइले मनगर मनवां रखिह अपनों धियनवां जाने कब बरिसे।बदरी0   ढहेजिन फूल पातसुघर सपनवां फेरि दीहहंसी खुशी अपनों भवनवां बइठअ एक खनकोनवां धइलअ सोचे के समनवां दूगो लकड़ी लवनवा जाने कब बरिसे। बदरी0     आनंद संधिदूत…

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मार देहला रजऊ

हिन्दी के कइला बेड़ा पार हो, भोजपुरिया के मार देहला रजऊ || मार देहला रजऊ हो मार देहला रजऊ, भोजपुरिया के मार देहला रजऊ ||   दिन दिन बढे अनुसूचिया से दुरिया ओही से घरवा में तलफे भोजपुरिया इज्जत भइल मोर उघार हो भोजपुरिया के मार देहला रजऊ।|   अटकन चटकन बहुत देखवला वादा के असरा दे खुबे भरमवला अब देवे के परी अधिकार हो भोजपुरिया के मार देहला रजऊ।|   होखे उजियार चलीं दियना जराई नेहिया के लेप से मनवा मिलाई मेटि जाई मन के अन्हार हो भोजपुरिया के…

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बाबूजी हरवाही करेलन

मेहनत में नाहीं कोताही करेलन । हँ, हमार बाबूजी हरवाही करेलन।   होत भिनुसारे जालें बाबू साहेब के दुअरा बैलन के डाल देलन खाये खातिर पुअरा कान्हा पर जुआठ, हाथे बैलन के पगहा पूछ लेलें बाबू साहेब से जोते के जगहा निकले ना घाम अगवाही करेलन। हँ, हमार बाबूजी हरवाही करेलन।   जेठ के घाम में  फुलवो कुम्हिला जाला, चारो गोरे चले वाला बैलो लरूआ जाला बाबूजी हमार नाहीं तनियो सा थाकेलें पैना उठाई के खुबे उ बैलन के हाँकेलें जइसे कि थाना में सिपाही करेलन। हँ, हमार बाबूजी हरवाही…

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बदरो मरसिया बांचत ह

संवत २०७३ अषाढ़ अन्हरिया पख के  रात क समय बा सगरो आसमान में बदरी घेरले ह तनिकों देखात नइखे , हवा सिहरा देत बा । हल्की झींसी पडै़ लगल ह , हवा चहूँ ओर सांय सांय करत बा । पुरा गोपालपुर गॉव नींद मे सुतल ह ,लेकिन हमरे आंखी मे नींद कहॉ ? अब पहिले जइसन गाव ना रहल । ई बात ना ह कि गॉव विकास ना भइल । परमुख बाबा राजनाथ के परयास से गॉव मे पिच रोड़ ,खरंजा, पा० स्कूल बा सोसाईटी क गोदाम बा पंचायत भवन…

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कोठेवालियाँ

रानी के बियाह क बड़ा.शोर ह बरात बलिया से आइल ह,दश दिन पहिलवै से टेंट तम्बू लगै शूरू हो गयल ,अरे होहि के चाहि आखिर तहसीलदार साहब क पहिली बेटी बिहल जात बा,दुआरे क रौनक त देखतै बनत बा।तहसीलदार साहब खूदै हर चीज क निगरानी करत हउए।खूटा गाड़े बदे बास चाहत ह ,उदया लगत बा किआज कुल बसवरिय काट घली,इ उदया सुसुरा तहसीलदार के देखैला चार पोरसा ऊपर चढ़ जाला।अउर आज त रमेशो (तहसीलदार क भाय)आवैके हउए।रमेश बहुत दिलदार मनयी हउए ,ओनके बारे मे का-का बतावै…जब उ पढ़ै जा ओनकर…

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किताब

बरहवीं क रेजल्ट आवे वाला ह किसना सुबेरेवै से भीतर-बाहर करत बा,खन मे कक्का केहन त खन मे माई केहन,मन ही मन आगे का होई यहू बात से डेरात ह,फेल त ना होईब,लेकिन अच्छा रिजल्ट आ जायी त विश्वविद्यालय में पढ़ब हे बजरंग बली निकै सबद सुनाया। रजवा घराने क रघवा समने से आवत देखायल,हे किसना कहवाँ जात हउए,!चल जल्दी चल रिजल्ट निकल गयल ह उए।चट्टी पर चलल जाय वही अखबार आयल होई,चल दउड़ के चल।किसना अउर एक रघवा सांस में चट्टी पर पहुंच गइनै दूनो अखबार में मूड़ी गड़वलै…

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