पुजारी जी के तोता

एगो रहन पुजारी जी. ऊ एगो सुग्गा पोसले रहन. रोज़ नियम से कथा-प्रवचन सुने जात रहन एगो महात्मा जी के कुटिया में. सुगवा रोज़ सोचे कि हमार मलिकवा रोज कहाँ जात बा भाई. एक दिन टोक देलस. पुछलस कि रोज़-रोज़ कहाँ जाइला रउआ नहा-धोआ के? पुजारी जी बतवलन कि एगो बहुते सिद्ध महात्मा जी बानी, उहाँ के जीव के मुक्ति के उपाय बताइला, हम उहाँ के प्रवचन सुने जाइला. सुगवा कहलस कि तनी हमरो बारे में पूछब ना कि हमरा एह बंदी जीवन से कब मुक्ति मिली? पुजारी जी कहलन…

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उजास

तीन जोन्हीं तलई में हो दने भँडारकोनी फुट् दनी झुप् दनी गिरल ह टूट के। केने ले दो उषा बबी अन्हियाँ बतास लेखा सतही प लोक लेली राखि लेली खूँट के। अँचरा के कोर में से गजबे उजास कढ़े, चेहरा के लाली मेली, सातो रंग कूट के। आदित के आवन प फुलवा के गुच्छा देते, अनगिन गेना फूल गिरल ह छूट के। दिनेश पाण्डेय।

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बिछावे जाल मछेरा रे

बिछावे जाल मछेरा रे सभके छीने बसेरा रे कहे हम भाग्य विधाता ह ईं सभ के जीवन दाता ह ईं सरग में सभका के पहुँचाइब हमहीं भारत माता ह ईं बढ़ावे रोज अंधेरा रे चकमक चकमक सगरो करे जोति नयन के चुपके हरे देखावे सपना रोज नया ई पेट सँघतियन के ई भरे भगावे दूर सबेरा रे कैद में सुरुज अउरी चान करे के बा ओकर अभियान बजावे ढोल ढमाका खूब नाप देलस धरती असमान उगावे खूब लमेरा रे करीं का कांटक सोचे रोज करेलन हथियारन के खोज बाँची मीन…

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