एगो त्रिवेणी इहवों बा

मन में घुमे के उछाह, सुन्दरता के आकर्षण आ दू देशन के राजनैतिक सीमा के बतरस के त्रिवेणी में बहत हम त्रिवेणी जात रहनी. हमनी के छह संघतिया रहनी जा आ एगो जीप के ड्राईवर. हमरा के छोड़ के सभे एह प्रान्त से परिचित रहे. हमरा बेचैनी के एगो इहो कारन रहे की आजु ले हम त्रिवेणी नाम इलाहबाद के संगम खातिर सुनले रहनी. ई त्रिवेणी कवन ह? उत्तर-प्रदेश के कुशीनगर जिला मुख्यालय से लगभग नब्बे किलोमीटर उत्तर-पछिम के कोन में बा ई. पाहिले त गंडक नदी के भयावहता के…

Read More

माफ करब माई !

गवें गवें जाम के लमहर रोगी बनत बनारस के एह घरी आउर बाउर हाल बा। चौमोहानियन के घेर के दुरगा माई के पंडाल बनावे के काम चल रहल बा। रोशनी के झालर लगावे खातिर ढेर लोग ऊंच ऊंच बांस , बल्ली आउर रसरी के सहारे लटकत देखात बाड़ें। ओह लोगन के देखि के रोंआ सिहर उठता ….. कि भहरा के गिर न जाँय सन? एकर जबाबों मन अपनही लप्प से हेर लेता,’ बाँड बाँडो जइहें आ नौ हाथ के पगहो ले जइहें’। मर मरा गइलें त ठीक ना त भर…

Read More

बिना बात के

तनि हई देखा फलाने ढेकाने के अंगुरी पकड़ि के चले सिखावतारें अरे! आजु ढेकाने त फलाने के नरेटी दबावतारें आ चीने लेंज के नियम बतावतारें जवना से जामल ओकरे बिरोध समय का फेरा अबले कराची में तिरंगा लहरावत रहलें ई सुनत सुनत कान पाक गइल बाकि पी ओ के ना भेंटाइल एहर कुछ लोग बीजिंग पर नजर गड़वले बा बाकि का कहीं कोरोनवा मंच कब्जियवले बा।   ई कतो पढ़े के ना मिलल एगो अमीर बाभन रहलें तबो बाभने शोषक कहालें भर भर के गरियावल जालें अइसने कुछ कइके ढेर…

Read More