देहिया रही टनाटन

देहिया रही टना-टन, करी योग राजा जी रउआ रहब निरोग, करी योग राजा जी दू के चार बनावे खातिर ,रउआ रहिले लागल खान-पान पर ध्यान ना दिहि,मन में पईसा जागल लागल जवानी में ,2 बुढ़ापा वाला रोग राजा जी देहिया रही टना-टन, करी………… पईसा तनिका कम कमाई , सेहत तनी बनाई सोना अईसन काया के, चम-चम चमकाई करी काया के सुख 2 खूब भोग राजा जी देहिया रही टना-टन, करी………… लाल बिहारी करस निहोरा ,करके देखी योग अमल करीं रोज रउवा ,रहब तब निरोग फायदा जन–जन में फईलाई 2 लिहि…

Read More

सावनी बहार

रिमझिम पड़ेला फुहार आइल सावनी बहार छान्ही छप्पर छवावे ला आ जा पिया चूड़िया पेन्हा जा पिया ना।   चमके बिजुरी चहुंओर घन बदरा करे शोर बनल खेतवा मे लेउवा लगवा जा पिया चूड़िया पेन्हा जा पिया ना।   बन बोले-नाचे मोर बहे पुरुवा झकझोर संगे चलिके रोपनिया करवा जा पिया चूड़िया पेन्हा जा पिया ना।   मन मे बाटे बिसवास पसरी सगरो उजास आइके गउवाँ मे खुसी मनवा जा पिया चूड़िया पेन्हा जा पिया ना।   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी    

Read More

भिजेलीं राधा रनिया, ए हरि

हरि हरि छहरि-छहरि बरिसे पनिया भिजेलीं राधा रनिया, ए हरि॥   घेरि-घेरि आवे बदरिया रामा ओढ़ि-ओढ़ि करिया चदरिया रामा अरे रामा दादुर सुनावे कहनिया भिजेलीं राधा रनिया,ए हरि॥   रहि रहि झींगुर झाल बजावे रामा सनकिरवा से ताल मिलावे रामा अरे रामा घूँघट में बाटे चननिया भिजेलीं राधा रनिया, ए हरि॥   साँझे फतिंगना गीतिया गावे रामा दीयरी तर नाच दिखावे रामा अरे रामा बनिहें बघरिया दुलनिया भिजेलीं राधा रनिया,ए हरि॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

Read More