आईल मेहरिया

भईल बियाह मोर आईल मेहरिया हम त सोचली उगल अंजोरिया। बीतल कुछ दिन बड़े ताव से मिलत रहल बड़े भाव से जानु,पियवा,बलमा कहिके कान में घोलत रहल मिसिरिया। भईल बियाह मोर आईल मेहरिया। बाद में आपन रूप देखऊलस जब बाकस से सूट निकलस कहे बी.एस.सी. कईले बानी बी.एड.के हव पास डिगिरिया बोल दा अपने माई से, हम ना पहिनब ईहाँ लुगरिया। भईल बियाह मोर आईल मेहरिया। चाट गुलप्पा रोजै खाले देखतै ननदी से लड़ी जाले बात-बात में नईहर अपने फोन लगाई खूब चिल्लाले देवर जईसे दुश्मन लागै कबो न बोलै…

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