किसान के जिंदगी

किसान के जिंदगी बड़ा कठिन बा, जी के केहु देखा देव हमके। होत सबेरे कान्हे कुदारी, दू-धूर कोड़ देखा देव हमके।। धरती के सीना के चीर  के, अन्न उगावेला किसान। तब जाके भोजन मिलेला, पूरा देश-दूनियाँ जहान।। भूख-प्यास केतनो लागल बा, चाहे केतनो बड़ मुसीबत बा। बिना बोले चुप-चाप सहेले, मजबूरी विवश मे ऊ।। पता ना कइसन किस्मत उनकर, देले बाड़े उ बिधाता। हरदम कर्जा मे डूबल रहेला, जे हवे भारत के अन्नदाता।। कबो-कबो भूखो सूतेले, जे हउअन अन्नदाता उ। गर्मी-ठंढ़ी का बरसात, सूत जालन डरेर पर उ।। आपदा, आदमियों…

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